वरिष्ठ कवि चंद्रशेखर बिरथरे की एक कविता | A Poem by Senior Poet Chandrashekhar Birthare

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मत , वोट , विशेषाधिकार

तुम्हारा ,
एक वोट ,
क्षुद्र राजनीति पर ,सत्य का प्रहार है ।कि
तुम्हारा ,
एक वोट ,
गंदी कुत्सित राजनीति पर ,
मत व्यक्त करने का अधिकार है ।
प्रजातंत्र के नाम पर ,
नेता-पार्टी तुम्हें भले ठगतीं हो ,
पर तुम्हारे पास ,
अपना विवेक है अपनी बुद्धि है ,
अपना आंकलन है ,
जिसे अभिव्यक्त करने का ,
तुम्हें संवैधानिक विशेषाधिकार है ।
आओ चलो ,
अपने मत , वोट , विशेषाधिकार का ,
प्रयोग करें ,
और अपना नेता चुने ।

चन्द्रशेखर बिरथरे ।

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