प्रसिद्ध कवि प्रदीप कांत की एक कविता – किस्सा गोई करती आँखें | Famous Poet Pradeep Kant’s Poem

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खुशी भले पैताने रखना,
दुरूख लेकिन सिरहाने रखना,

कब आ पहुँचे भूखी चिडिया,
छत पर कुछ तो दाने रखना,

अर्थ कई हैं एक शब्द के,
खुद में खुद के माने रखना,

यूँ ही नहीं बहलते बच्चे,
सच में कुछ अफसाने रखना,

घाघ हुए हैं आदमखोर,
ऊँची और मचाने रखना,

जब तुम चाहो सच हो जाए,
कुछ तो ख्वाब सयाने रखना,

प्रदीप कान्त

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