प्रसिद्ध अभिनेत्री तथा कवियत्री मल्लिका राजपूत की एक कविता

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mallika

देश के युवा वर्ग को मेरा संदेश :-

साँस की डोर टूटे तो टूट जाए मगर पद ना राहों से भटकाना तुम,
जब बुलाये धरा माँगे क़ुर्बानियाँ देश हित में देखो चले आना तुम ।।

देश की अल्हड़ जवानी हो तुम ,
आने वाले समय की कहानी हो तुम ।
भाग्य हो तुम वतन का समझ गर सको ,
शहीदों की अंतिम निशानी हो तुम ।।
कितना हो साख रख इन हवाओं का क्या ये तिरंगा ऊँचा ही लहराना तुम ।।
जब बुलाए धरा माँगे क़ुर्बानियाँ देश हित में देखो चले आना तुम ।।

देश हित जो मिटे वो अपने ही थे,
उनकी आँखों में भी उनके सपने भी थे ।
सब भुला कर वतन याद उनको रहा ,
ये वतन उनका था वो वतन के ही थे ।।
याद रखना भागीदारी को उनकी ज़िम्मेदारी को डटके निभाना तुम ।।
जब बुलाए धरा माँगे कुर्बनियाँ देश हित में देखो चले आना तुम ।।

कवियत्री
मलिका राजपूत शिंदे
०२-१०-२०१८

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