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कई शुभ संयोगो के साथ आया है ‘छठ महापर्व’

Posted on: 12 Nov 2018 09:30 by shilpa
कई शुभ संयोगो के साथ आया है ‘छठ महापर्व’

कार्तिक शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को छठ पूजा की जाती है। इस बार छठ पूजा 11 नवंबर से की जाएगी जाएगी। शुक्ल पक्ष की चतुर्थ तिथि से छठ पर्व प्रारंभ होता है और सप्तमी तिथि को इस पर्व का समापन होता है। इस पर्व की शुरआत मुख्य रूप से बिहार और झारखंड से हुई है और अब पुरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।

भगवान सूर्य की पूजा कार्तिक महीने में पारंपारिक तरीके से की जाती है। इस मास में जब सूर्य नीच राशी में हो उसकी विशेष उपासना की जाती है। विशेषतः षष्ठी तिथि की उपासना संतान प्राप्ति एवं संतान की दीर्घायु के लिए की जाती है।

आइए जानते है किस विधि से की जाती है छठ-पूजा

इस पर्व की शुरवात कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और सप्तमी को अरुण वेला में इस व्रत का समापन होता है। याने यह पर्व चार दिनों तक चलता है।

चतुर्थी को इस व्रत की शुरुआत होती है. प्रातः स्नानादि के बाद इसे प्रारंभ किया जाता है और केवल लौकी और चावल का आहार ग्रहण किया जाता है।

पंचमी के दिन ‘लोहंडा-खरना’ कहा जाता है। इस दिन व्रत रखा जाता है और शाम को बिना नमक या चीनी से बनी खीर का सेवन किया जाता है जो गन्ने के रस से बनी होती है।

षष्ठी दिन पूर्ण उपवास रखकर संध्या काल में डूबते हुए सूरज को विशेष प्रकार का पकवान “ठेकुवा” और मौसमी फल चढ़ाकर दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है।

सप्तमी के दिन सूर्योदय के समय उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाता है और कच्चे दूध और प्रसाद को ग्रहण कर के व्रत का समापन किया जाता है।

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