Breaking News

आयकर अपीलीय अधिकरण का 78वां स्थापना दिवस

Posted on: 29 Jan 2019 13:38 by Rakesh Saini
आयकर अपीलीय अधिकरण का 78वां स्थापना दिवस

आयकर अपीलीय अधिकरण ने करदाताओं को सुलभ एवं सत्वर न्याय प्रदान करने के 78 वर्ष पुरे किए जाने पर इंदौर खंड पीठ में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया जिसमे कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. यह अधिकरण 78 वर्ष पूर्व सन 1941 से स्थापित किया गया था और आयकर सम्बंधित आवेदनों एवं अपील के निराकरण की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है. यह अधिकरण की सफलता से प्रेरित होकर सरकार ने अप्रत्यक्ष कर, प्रशासन, रेल आदि क्षेत्रों में ऐसे न्यायाधिकरण स्थापित करने का प्रयोग किया गया है.

इस अधिकरण की विशेषता है की इसमें दो सदस्य पक्षों को सुनकर फैसला देते है और दोनों सदस्य अलग अलग विषयों के निष्णात होते है. एक सदस्य विधि विषय से होता है जो या तो जुडिशरी सर्विसेज से चयनित या 10 वर्ष वकालत के अनुभव वाला होता है और दूसरा सदस्य लेखा में पारंगत 10 वर्षों के अनुभव वाला सीए या कमिश्नर होता है. इस समीकरण से विधि और तथ्य दोनों पर फैसला होता है. यह अभिकरण तथ्यों पर फैसला देने वाली आखरी संस्था होती है.

Income -tax

78 वे स्थापना दिवस समारोह की रूप रेखा माननीय न्यायिक सदस्य श्री कुल भारत और लेखा सदस्य श्री मनीष बोराड की मार्गदर्शन में हुए और अतिथि मुख्य आयकर आयुक्त श्री अजय चौहान थे. इस कार्यक्रम में 75 वर्ष से अधिक आयु के 10 वरिष्ठ सीए एवं कर सलाहकारों का सम्मान किया जिसमे श्री मुंजाल, श्री धनञ्जय दवे, श्री बाबूलाल बंसल आदि थे जिन्होंने न्याय दिलाने में करदाता और सरकार दोनों को वर्षों तक अपनी सेवाएं दी.

मुख्य आयकर आयुक्त ने इस अवसर पर कहा की इस संस्था की खासियत है कि 92 प्रतिशत ट्रिब्यूनल आर्डर के विरुद्ध विभाग कोई अपील नहीं करता है और उन फैसलों को स्वीकार कर लेता है. केवल उन्ही केसेस में अपील हाई कोर्ट में की जाती है जहा महत्वपूर्ण कानून सम्बंधित प्रश्न होता है. उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने यह सीमा तय कर दी है कि 50 लाख तक के कर तक के फैसलों में विभाग अधिकरण के फैसलों को स्वीकार कर आगे अपील नहीं करेगा जिससे न्यायपालिका को राहत मिलेगी.

लेखा सदस्य श्री मनीष बोराड ने बताया कि आयकर अपीलीय अधिकरण प्रत्यक्ष कर मुक़दमा प्रणाली में अंतिम तथ्य खोजी अधिकरण है तथा यह करदाताओं और प्रशासन के साथ दुरिगत संवाद रखकर व्यवस्था में विश्वास पैदा करने में सफल रहा है। अधिकरण की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण है.

वरिष्ठ विधि सदस्य श्री कुल भारत ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि प्रौद्योधगकी के कारण, कारोबार की लागत कई गुना बढ़ गई है। तकनीकी रूप से कुशल उद्यमी तथा वैश्विक भारतीय सवोत्तम पक्ष पध्दतियों के बराबर न्याय प्रदान प्रणाली की मांग करते हैं। इन इक्कीसवीं शताब्दी के उद्यमियों की अपेक्षाओं को पूरा करना एक चुनौतिपूर्ण कार्य है। मुझे उम्मीद है कि हम सब मिलकर इस चुनौती को पूरी कर्तव्यनिष्ठा से निपटेंगे और राष्ट्रनिर्माण एवं विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

टैक्स बार कि ओर से अध्यक्ष श्री सुभाष देशपांडे ने बताया कि मध्यप्रदेश में इंदौर शहर में खंडपीठ स्थापना को इस वर्ष 50 वर्ष पूर्ण हो रहे है और इंदौर के आर्थिक विकास में इस अधिकरण का बहुत बड़ा योगदान है.

कार्यक्रम का संचालन टैक्स बार के सहसचिव श्री गिरीश अग्रवाल और अधिकरण की सुश्री सोनल नीमा हिंदी अनुवादक ने किया और इसमें श्री पी. डी. नागर, विजय बंसल, आदि मौजूद थे.

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com