मुख्यमंत्री जी क्या आपको शर्म आती है | 6 Months Ago Kamal Nath himself was expressing the Biggest Concern about Women Protection…

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आज से कुल जमा 6 माह पहले इंदौर ही नहीं पूरे प्रदेश की सड़कों पर कांग्रेस के नेता महिलाओं के साथ होने वाले ज्यादती के मामलों को जोर-शोर से उठाते थे। महिलाओं की आबरू की सबसे ज्यादा चिंता जाहिर करते कांग्रेसी जिनमें खुद कमलनाथ भी दुबले हुए जा रहे थे।

प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस नेता अपनी आंखों में गुस्सा लाकर टीवी पर चिल्लाते थे कि हमारी सरकार बनी तो हम प्रदेश में भयमुक्त माहौल बनाएंगे। लेकिन सरकार में आने के बाद जब इसे सुधारने की जिम्मेदारी आई तो सबके सब वोटों और नोटों की चिंता में लग गए। चुनावों में जीत के लिए हर वो काम करने लगे जिससे वोट बैंक बने।

इस दौरान कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, बिजली, ट्रैफिक व्यवस्था जैसे जनता के मुद्दे एक तरफ ही पड़े हुए हैं। व्यवस्था सुधार के नाम पर ट्रांसफरों की झड़ी लगा दी। लेकिन जमीन पर सब दूर अंधेरा ही रहा। यही कांग्रेसी पहले कहते थे कि ट्रांसफर से व्यवस्था नहीं सुधरती, लेकिन आज वो खुद ही उसमें लगे हुए हैं। भोपाल के नेहरूनगर के पास मासूम के साथ हुई घटना हो, या इंदौर में 7 दिन पहले इंदौर के तेजाजीनगर थाने में गर्भवती के साथ बलात्कार का मामला, कोई गंभीरता न तो पुलिस में दिखी न सरकार में।

दिखे भी कैसे प्रदेश में छोटे बड़े 29 मंत्री हैं, लेकिन उनमें महिलाएं महज 2 हैं। आपको महिलाओं की आवाज क्यों सुनाी देगी। सुना है मुख्यमंत्री, कांग्रेस के नेताओं के साहब हैं। लेकिन मुझे तो 6 माह में ये व्यवहार लाट साहब जैसा ज्यादा नजर आया। आप कभी ऐसी घटनाओं पर विचलित होते नहीं दिखे। लाट साहबों की तरह आपकी ओर से बयान प्रवक्ता जारी कर देते हैं। या ट्विटर पर अपनी सहानुभूति जो सफाई ज्यादा होती है वो डाल देते हैं।

क्या ट्विटर और बयान महिलाओं को सुरक्षित कर सकते हैं। क्या गर्म मौसम में गर्मी के कारण बिलखते बच्चों को ट्विटर की चिडिय़ा हवा दे सकती है। ट्विटर और बयानों की इसी सरकार के कारण ही चार माह में जो हालत हुई है उसके बाद भी कांग्रेसियों और खासतौर पर उनके साहब की नजरों के पानी में जनता कहीं नहीं दिख रही है।

मत भूलो की ये जनता है जो 15 साल से बैठे लोगों को घर बैठा सकती है तो आपको भी मदांध होने की सजा घरों के अंदर तक भी छोड़ सकती है। प्रदेश की जनता को साहब नहीं बल्कि सुशासन चाहिए। यदि वो नहीं दे सकते हो तो तैयार रहिए, आपको जनता ही बता देगी की साहब आप नहीं जनता है।

बाकलम – नितेश पाल

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