जानिए पक्षियों में क्यों सर्वश्रेष्ठ है ‘मोर’

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नई दिल्ली : आमतौर पर आप सभी जानते होंगे कि मोर संसार का सबसे सुन्दर पक्षी माना जाता है। सनातन धर्म में मोर पंख को बहुत आदरणीय स्थान प्राप्त है। भारतीय संस्कृति में उसके महत्व को देखते हुए ही भारत सरकार ने भारतीय वन्य परिषद की अनुशंसा पर सन् 1962 में इसे राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया।

सभी शास्त्रों व ग्रंथो तथा वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र में मोर के पंखों का अति महत्त्वपूर्ण स्थान है। मोर के पंख घर में रखने का बहुत महत्त्व है इसका धार्मिक प्रयोग भी है, इसे भगवान श्री कृष्ण ने अपने मुकुट पर स्थान दे कर सम्मान दिया| शास्त्रों के अनुसार मोर के पंखों में सभी देवी-देवताओं और सभी नौ ग्रहों का वास होता है। ऐसा क्यों होता है इसकी हमारे धर्म ग्रंथों में कथा है जो इस प्रकार है..

प्रचलित कथाओं के अनुसार, आदिकाल में संध्यासुर का नाम का एक दैत्य था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। उसने शिव से अतिवीर होने का वरदान भी लिया था। वर पाने के बाद उसे इतना अहंकार हुआ कि उसने विष्णु भक्तों को ही परेशान करना शुरु कर दिया और कई देवताओं को बंदी बना लिया। उसने भक्ति से इतनी शक्ति प्राप्त कर ली थी कि भगवान विष्णु भी उसका वध करने में समर्थ नहीं थे।

कहते हैं जब देवतागण, दैत्यासुर के अत्याचार से बहुत दुःखी हो गए तो उन्होंने योगमाया को सहायता के लिए पुकारा योगमाया ने नवग्रहों और देवताओं के तेज से एक पक्षी की रचना की जिसे नाम दिया गया ‘मोर’। इस ‘दिव्य मोर’ के पंखों में छिपकर अपनी शक्तियां बढ़ाईं और एक दिन मोर के साथ असुर पर आक्रमण कर दिया। संध्यासुर मोर के आगे टिक नहीं पाया और मोर के सामने घुटने टेक दिए। तभी से मोर पंख में नवग्रहों और तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की शक्ति समाहित हो गई।

घर में मोर पंख को रखने से शुभता का संचार होता है तथा सुख-समृद्धि और लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है। घर के वातावरण में मौजूद नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं और सकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं। सांप मोर पंख से भय खाते हैं क्योंकि मोर का प्रिय आहार है सांप। अत: सांप उस स्थान में नहीं जाते जहां उन्हें मोर या मोर पंख दिखाई देते हैं।

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