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गजब! इस इंजीनियर ने बिना सीमेंट बना डाला था ‘कृष्‍णा राजा सागर बांध’..

Posted on: 15 Sep 2017 08:14 by Ghamasan India
गजब! इस इंजीनियर ने बिना सीमेंट बना डाला था ‘कृष्‍णा राजा सागर बांध’..

नई दिल्ली : आज पूरे भारत में 15 सितंबर को ‘इंजीनियर डे’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी अवसर पर आज हम आपको इंजीनियर और विषेशज्ञ एम. विश्वसरैया के बारे में बताने जा रहे है। विश्वसरैया का जन्म साल 1860 में 15 सितंबर को हुआ था। आज भारत में उनका जन्मदिन ‘इंजीनियर डे’ के रूप में मनाया जाता है।

जानें विश्वसरैया के जीवन से जुड़ी बातें..
इनका जन्म मैसूर (कर्नाटक) के कोलार जिले में हुआ था। उनका पुरा नाम डॉ. मोक्षगुंडम विश्वसरैया है।  उनके पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री तथा माता का नाम वेंकाचम्मा था।

आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने बंगलुरु के सेंट्रल कॉलेज में एडमिशन लिया। लेकिन पढाई के बीच में आर्थिक स्थिति में आड़े आई, जिसके बाद उन्हें ट्यूशन लेना पड़ा। इसके बाद मैसूर सरकार की मदद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पुणे के साइंस कॉलेज में एडमिशन लिया। पढ़ाई पूरी होने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इन्हें नासिक में सहायक इंजीनियर के पद पर उन्हें नियुक्त किया।  आज एम. विश्वसरैया के प्रयासों का नतीजा है कि ‘कृष्णा राजा सागर’ बांध,भद्रावती आयरन एंड स्टील वक्स, मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फैक्टरी, मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर का निर्माण हो पाया। उन्होंने पानी रोकने वाले ऑटोमेटिक फ्लडगेट का डिजाइन तैयार कर पेटेंट कराया, जो साल 1903 में पहली बार पुणे के खड़कवासला जलाश्यफ में इस्तेतमाल हुए।Related imageवीडियो गेम ‘सुपर मारियो ब्रदर्स’ को आज भी याद करते हैं बच्चे साल 1932 में ‘कृष्णास राजा सागर बांध’ के निर्माण में उन्होंने चीफ इंजीनियर के रूप में भूमिका निभाई थी। लेकिन इस बांध को बनाना इतना आसान नहीं था क्योंकि ‘कृष्णा राजा सागर बांध’ के निर्माण के दौरान देश में सीमेंट नहीं बनता था।
Image result for एम. विश्वसरैयालेकिन विश्वसरैया ने हार नहीं मानी और उन्होंने इंजीनियर के साथ मिलकर ‘मोर्टार’ तैयार किया जो सीमेंट से ज्यादा मजबूत था। ये बांध कर्नाटक राज्य में स्थित है।उस वक्त ये एशिया का सबसे बड़ा बांध था साबित हुआ जिसकी लंबाई 2621 मीटर और ऊंचाई 39 मीटर है। साल 1912 में उन्हें मैसूर के महाराजा ने दीवान यानी मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया था।
Related imageहैदराबाद के लिए उन्हों ने बाढ़ से बचाने का सिस्ट म डिजाइन तैयार किया, जिसने उन्हें  सेलिब्रिटी बना दिया। आपको बतादें वह शिक्षा की महत्व को अच्छे से समझते थे। लोगों की गरीबी और कठिनाइयों का मुख्य कारण वह अशिक्षा को मानते थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में मैसूर राज्य में स्कूलों की संख्या को 4,500 से बढ़ाकर 10,500 कर दिया।
Image result for एम. विश्वसरैयाइसके साथ ही स्टूडेंट्स की संख्या भी 1,40,000 से 3,66,000 तक पहुंच गई। मैसूर में लड़कियों के लिए अलग हॉस्टल तथा पहला ‘फ‌र्स्ट ग्रेड कॉलेज’ (महारानी कॉलेज) खुलवाने का श्रेय भी विश्वेश्वरैया को ही जाता है। उन्हें साल 1955 में भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित हो चुके हैं। Image result for एम. विश्वसरैयाजब वह 100 साल के हुए तो भारत सरकार ने डाक टिकट जारी कर उनके सम्मान को और बढ़ाया। 101 साल की उम्र में 12 अप्रैल 1962 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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