30 साल की पत्रकारिता का सफरनामा | 30 years of ‘Journalism’

0
31
hemant pal

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत पाल

वक़्त का पहिया कितनी तेजी से घूमता है, पता ही नहीं चलता! आज मुझे पत्रकारिता में आए 30 साल हो गए! याद है उस दिन रंगपंचमी थी, जब मैंने ‘नवभारत’ इंदौर ज्वाइन किया था। उसके बाद नईदुनिया, जनसत्ता (मुंबई), चेतना, फिर नईदुनिया (इंदौर/भोपाल) से होते हुए आज ‘सुबह-सवेरे’ तक का सफर तय किया। कई विषयों पर लिखा! इन तीन दशकों में पत्रकारिता के हर रूप देखे।

वो प्रभाव भी जब अखबार में ‘संपादक के नाम पत्र’ में चार लाइन छप जाती थी, तो प्रशासन हिल जाता था! … आज पूरा पन्ना भी छप जाए तो किसी के माथे पर सलवटें भी नहीं आती! पत्रकारिता का ये बदलाव किसी और कारण से नहीं, पत्रकारों के गिरते आचरण की वजह से आया है। छोटे-छोटे स्वार्थ या राजनीतिक फायदे के लिए झुकने वालों ने अपनी ही रीढ़ की हड्डी नहीं झुकाई, पूरी कौम को बदनाम कर दिया! … लेकिन, इन 30 सालों में मैं न तो कभी झुका और न टूटा! क्योंकि, मेरे उसूलों की रीढ़ बहुत मजबूत है।

सर्वश्री प्रभाष जोशी, अभय छजलानी, एसपी सिंह, उदयन शर्मा, उमेश त्रिवेदी, अच्युतानंद मिश्र, राहुल देव, कमल दीक्षित जैसे लोगों के साथ काम करने का अनुभव ही मेरी इन 30 सालों की पूंजी है। पत्रकारिता के इन अक्षुण्ण संस्कारों की बदौलत ही मैं आजतक बेदाग़ और निर्विवाद रह सका! आज के दिन सभी को प्रणाम!

Read more : बेबाक, बेधड़क और बेतकल्लुफ हैं पुण्य प्रसून

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here