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23 मई का यह नवप्रभात… | 23rd may Historic Winning for ‘BJP’

Posted on: 23 May 2019 18:37 by bharat prajapat
23 मई का यह नवप्रभात… | 23rd may Historic Winning for ‘BJP’

23 मई का यह नवप्रभात ,
नई आभा लेकर आया है ।
मोदी मोदी और बस मोदी ,
यह एक मंत्र ही छाया है ।

कितनी कुपरंपरा टूटीं,
कितने सिंहासन पस्त हुए।
जहरीले समीकरण सारे,
मोदी के आगे ध्वस्त हुए।

परिवारवाद मां बेटे का ,
जीजा और बहन बुला लाया ।
लेकिन सबके भांडे फूटे,
सूरज पर थूका ,क्या पाया?

सारी मर्यादाएं तोड़ी ,
मोदी को चोर बताया था ।
मोदी के उजले दामन पर ,
झूठा कीचड़ फैलाया था ।

जनता ने दिया उन्हें उत्तर,
जो कीचड़ उनसे पाया था।
उसमें अनगिनत कमल उपजे ,
फिर से मोदी मुस्काया था।

ममता दीदी बनकर चंडी ,
थी मोदी को ललकार रही।
दस शीशों वाला गठबंधन ,
मोदी जाए यह बात कही।

हाथी पर बैठ बुआ आई,
साइकिल पर बैठ, आए बबुआ।
दोनों ने बहुत जोर मारा ,
लेकिन कोई जादू नहीं चला।

कर्नाटक और आंध्र में भी ,
सब बैठे बैठे कांप रहे ।
हर और कमल ही खिलता है,
यह सोच सभी मुंह ढांप रहे ।

अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया,
वंशवाद से छले गए ।
बन सकते थे मंत्री कोई,
किंतु कहीं के नहीं रहे।

शत्रु बने शत्रुघन सिन्हा ने,
अबके मुंहकी खाई है ।
रविशंकर के हाथों उनको,
दे दी गई विदाई है ।

सिद्धू जी ने ताल ठोक कर,
देश देशद्रोह का काम किया ।
देशभक्त सारी जनता ने ,
उन्हें उठाकर पटक दिया।

और आप के बाप बने थे,
दिल्ली के झूठे सरताज।
स्वप्न दिखा झूठे जनता को,
चाह रहे थे करना राज।

काट चुका है देश आज उन,
स्वार्थ पूर्ण जंजीरों को।
भारत मां को जो छलती थीं,
उन काली तकरीरों को।

राष्ट्रप्रेम का ,देश भक्ति का ,
है सब ने सम्मान किया।
प्राण निछावर किये देश हित,
उन वीरों का मान किया ।

सब का हाथ ,साथ में लेकर,
जो विकास का मार्ग चुने ।
नित नूतन भविष्य के सपने ,
देश उन्हीं के साथ बुने ।

जो आतंकवाद का कर दे ,
साफ-सफाया धरती से ।
देश नहीं छोड़ेगा उसका ,
हाथ कभी भी गलती से।

आओ मोदी स्वागत करता ,
पुनः तुम्हारा भारत देश।
ले इसकी कमान हाथों में ,
इसे बनाओ सबसे श्रेष्ठ ।

इंदु पाराशर

                    

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