19 लाख किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ: दुबे

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इंदौर । प्रदेश कांगे्रस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे एवं शहर कांगे्रस कमेटी इंदौर के कार्यकारी अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने प्रदेश सरकार के विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। अभयु दुबे ने बताया कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के विकास की नई इबारत को आकर देना शुरू किया है, जिस हालत में कांग्रेस सरकार को प्रदेश मिला था, उसमें आर्थिक बदहाली, गर्त में गिरे हुए सामाजिक सूचकांक, चरम पर अपराध, किसानों का शोषण तथा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों को और पीछे धकेल देने की मनोवृत्ति।

उन्होंने बताया कि भाजपा के अंतिम सप्लीमेंट्री बजट में 8 हजार करोड़ रूपए का रिवेन्यू डेफेसिट था। रिवेन्यू और कैपिटल एक्पेंडेचर का अंतर पांच गुना हो गया था। वर्ष 2018 में कैपिटल एक्पेंडेचर 31061 करोड़ था और रिवेन्यू एक्पेंडेचर 155623 करोड़ रूपए था। वर्ष 2018-19 में भाजपा की सरकार 187636.39 करोड़ का कर्ज छोड़ गई थी। सही मायने में ओवर ड्राफ्ट की परिस्थितियां थीं। शिवराज सरकार ने लगभग 10 हजार करोड़ रू. के भुगतान रोक दिए थे।, इसलिए ओव्हर ड्राफ्ट नहीं हुआ। प्रदेश के 72 प्रतिशत स्कूलों में बिजली के कनेक्शन नहीं थे, 31.65 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापित कर रहे थे। 80 लाख परिवार गरीबी रेखा कार्डधारक थे।

68.25 लाख परिवार मनरेगा की मजदूरी के लिये बाध्य थे, प्रति व्यक्ति आय 29 राज्यों में 27 वें स्थान पर थी। कृषि विकास दर 2017-18 में 0.1 प्रतिशत रह गई थी। 1.66 लाख हेक्टेयर खेती का रकबा कम हो गया था, शिशु मृत्यु दर देश में सर्वाधिक (47) थी। प्रदेश की 52.4 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी की शिकार थीं। 48 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार थे, दो लाख से अधिक आईपीसी के क्राइम मप्र में हो रहे थे। 46317 महिलाएं बलात्कार का शिकार हुई थीं, 25566 महिलाएं अपहरित कर ली गई थीं, अर्थात देश की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाला मध्यप्रदेश अपराधियों और अराजक तत्वों की गिरफ्त में था।प्रदेश के 50 लाख किसानों के दो लाख रूपए तक के कर्जमाफी का रास्ता साफ कर दिया गया। अब तक 19 लाख से अधिक किसानों का दो लाख रूपये तक का कर्ज माफ किया गया।

आधुनिक गांवों का स्वप्न होगा साकार

कमलनाथ सरकार गांवों के आधुनिकीकरण के दृष्टिगत काॅमन सर्विस सेंटर की स्थापना ग्राम पंचायत स्तर पर करने जा रही है, जिसके तहत गर्वेंमेंट टू सिटीजन सेवाएं निःशुल्क या नाम मात्र के शुल्क पर मुहैया कराई जाएगीं। जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, बिजली बिल का भुगतान, मोबाइल रीचार्ज इत्यादी सभी शासकीय प्रमाण पत्र। एक अभिनव पहल शुरू करते हुए युवा ग्राम शक्ति समिति गठित करने का कमलनाथ सरकार ने मानस बनाया है। 23 वर्ष तक के युवाओं को गांवों में सामाजिक सरोकारों से जोड़ा जाएगा, ताकि गांवों को सामाजिक संदर्भों में गांवों के युवा एक नई दिशा दे सकें। रूढ़ीवादिता पर अंकुश लगाकर, कुरीतियों को समाप्त करके गांवों को नई दिशा दे सके।

देश में सर्वाधिक स्वच्छ होंगे प्रदेश के गांव

मप्र कांगे्रस सरकार का संकल्प है कि समूचे देश में सर्वाधिक स्वच्छ और हरे गांव मध्यप्रदेश के होंगे। मध्यप्रदेश के समस्त विकासखंड़ों के लगभग 250 क्लस्टरों में इस योजना में क्रियान्वयन करने की तैयारी की गई है। इसके आधार पर प्रदेश के सभी ग्रामों में कचरा प्रबंधन एवं गंदे पानी के निस्तारण की योजना पर कार्य किया जा रहा है। हम आने वाले समय में मध्यप्रदेश का सर्वाधिक स्वच्छ ग्राम प्रतिस्पर्धा भी आयोजित करेंगे।

किसानों को दी सबसे सस्ती बिजली

मप्र के 28 लाख किसान परिवारों का 10 हाॅस पाॅवर तक के कृषि पंप की बिजली का बिल आधा कर दिया गया। किसानों को देश की सबसे सस्ती बिजली सिर्फ 44 पैसे प्रति यूनिट दी जा रही है। इतना ही नहीं अनुसूचित जाति-जनजाति के 7.5 लाख किसानों को कृषि उपयोग के लिये बिजली मुफ्त दी जा रही है। कमलनाथ सरकार किसानों को बिजली का बिल आधा करके लगभग 12.5 हजार करोड़ रूपये की रियायत दे रही है।

महंगी बिजली का अंधेरा हुआ दूर-सस्ती बिजली रोशनी भरपूर

मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों पर शिवराज सरकार 47 हजार 400 करोड़ का घाटा छोड़कर गई थी, इसके बावजूद कमलनाथ सरकार ने 150 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पहले 100 यूनिट तक 1 रूपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली मुहैया करा रही है। 150 यूनिट खर्च करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 1 करोड़ 2000 है। अर्थात कुल 1 करोड़ 15 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं में से 90 प्रतिशत से अधिक प्रदेश के नागरिकों को इस इंदिरा गृह ज्योति योजना का लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं अुनसूचित जाति-जन जाति के 6 लाख 70 हजार उपभोक्ताओं को सिर्फ 25 रूपए प्रतिमाह में बिजली उपलब्ध करायी जा रही है।

पीने योग्य पानी का कानूनी अधिकार ‘राईट-टू-वाॅटर’

मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जिसमें प्रदेश के सभी नागरिकों को पीने के पानी का कानूनी अधिकार दिया जाएगा। इस कानून का मूल मंत्र है, पर्याप्त पानी, पहुंच में पानी और पीने योग्य पानी। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में 5.81 करोड़ लोग 128231 बसाहटों में निवास करते हैं। उनमें मात्र 12 प्रतिशत ग्रामीण घरों में हम नल के माध्यम से अब तक पानी पहुंचा पाए। हमने सभी ग्रामीण घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नदियों के पुर्नजीवन का काम भी इस कानून का लक्ष्य होगा। इसका मूल मंत्र है ‘अविरल धारा-निर्मल धारा-स्वच्छ किनारा।’ इसी प्रकार मध्यप्रदेश में लगभग 2400 झीलें और तालाब हैं, जिनमें 1 से 5 स्क्वेयर किलोमीटर के 150, 5 से 20 स्क्वेयर किलोमीटर के 22 और 20 स्क्वेयर किलोमीटर से अधिक के 7 जलाशय हैं, जिनकी जीवंतता उनके कैचमैंट एरिया पर निर्भर करती है। इसलिए आवश्यक है कि उनके कैचमैंट एरिया को प्रोटेक्ट किया जाए, इसलिए ‘राइट टू वाटर एक्ट’ में कैचमेंट एरिया प्रोटेक्शन एक्ट को शामिल किया जाएगा। कमलनाथ सरकार इसी तर्ज पर प्रदेश के सभी नागरिकों को शीघ्र ही स्वास्थ्य का कानूनी अधिकार भी देगी। राईट-टू-हेल्थ।

मिलावट मुक्त मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के मिलावटखोरी के दंश के खत्म करने का संकल्प कमलनाथ सरकार ने लिया है। प्रदेश में मिलावटखोरों के खिलाफ एक बड़ा अभियान प्रारंभ किया है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने क्रूर लापरवाही करते हुए मिलावाटखोरों के आगे घुटने टेक दिये थे। मध्यप्रदेश में मात्र एक शासकीय खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, ईदगाह हिल्स भोपाल में स्थित है, जिसकी क्षमता 6000 परीक्षण प्रतिवर्ष है। यह चैंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि अप्रैल 2016 से दिसम्बर 2018 तक क्षमता नहीं होने की वजह से तत्कालीन भाजपा सरकार ने 13 हजार खाद्य नमूनों का परीक्षण ही नहीं कराया। प्रदेश की कांगे्रस सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है और जल्द ही जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर में खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की ओर कदम बढ़ाया जा रहा है। इतना ही नहीं सर्वोच्च अदालत ने जब अपेक्षा की, कि राज्य सरकारें आईपीसी के सेक्शन 272 को संशोधित कर मिलावटखोरी के खिलाफ उम्र कैद की सजा का प्रावधान करे तब तत्कालीन भाजपा सरकार ने एक शपथ पत्र के माध्यम से सर्वोच्च अदालत को सूचित किया था कि वे मिलावटखोरों के खिलाफ आजन्म कारावास तक के दंड को प्रावधानित कर रहे हैं। मगर, सर्वोच्च अदालत में दिये गये शपथ पत्र को भी गंभीरता से न लेते हुए इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं किया।

विगत दिनों एनीमल वेलफेयर बोर्ड आॅफ इंडिया के सदस्य श्री मोहन सिंह आलूवालिया ने मिनिस्ट्री आॅफ र्साइंस एंड टेक्नालाॅजी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि देश में 68.7 प्रतिशत दूध और दूध से बनने वाले उत्पादों में मिलावट होती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया था कि दूध की उत्पादित उपलब्धता 2017-2018 में 375 ग्राम प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन है और खपत 480 ग्राम प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन है। अर्थात उत्पाद से कहीं ज्यादा अधिक खपत हो रही है।

इतना ही नहीं वल्र्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने भारत सरकार को एक एडवाइजरी जारी की है कि अगर दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावटखोरी को तुरंत नहीं रोका गया तो भारत को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और वर्ष 2025 तक भारत के 87 प्रतिशत लोग केंसर जैसी गंभीर बीमारी की जद में आ जायेंगे।

मध्यप्रदेश देश का वह पहला राज्य बनने जा रहा है, जिसने मिलावट मुक्त मध्यप्रदेश का संकल्प लिया है। हम, सर्वोच्च अदालत के दिशा-निर्देशों के पालन के लिये प्रतिबद्ध हैं और मिलावटखोरों के खिलाफ आजन्म कारावास का प्रावधान करेंगे। प्रदेश के नागरिकों से आग्रह है कि खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम में सभी नागरिकों को धारा-40 के तहत यह अधिकार दिया गया है कि वह भी स्वयं खाद्य पदार्थों का विश्लेषण करा सकता है। अतः समूचा मध्यप्रदेश, प्रदेश को मिलावटखोरी के दंश से मुक्त कराने के लिए सरकार के इस कदम में सहभागी बने।
मां नर्मदा निर्मल होगी

वर्तमान में प्रदेश में कुल 378 शहरी स्थानीय निकाय है जिसमें से 16 नगर निगम है, 98 नगर पालिका निगम और 264 नगर परिषद है और 30 नगर परिषद नई अधिसूचित की गई है। हमने लक्ष्य रखा है कि इन सारे शहरी निकायों में हम शुद्ध पानी और सेप्टेज मैनेजमेंट अर्थात जो अपशिष्ट है का प्रबंधन किया जाए। इस दिशा में हमने बीते दिनों इन्टर नेशनल बैंकिंग अथारिटी जैसे कि योरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक, जर्मन बैंक, वल्र्ड बैंक ऐशियन डेवलपमेंट बैंक, न्यू डेवलपमेंट बैंक इत्यादि से बीतें दो माह में चर्चा की है और वित्तीय प्रबंधन के लिए इन संस्थानों ने अपनी सैद्धांतिक सहमति भी प्रदान की है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट हमारी प्राथमिकता

शहरों की सड़कों पर बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए भविष्य के मध्यप्रदेश के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाना बेहत जरूरी है। इस दिशा में भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना पर 6.22 किलो मीटर के प्रायरिटी पैकेज एम्स से सुभाष नगर और इंदौर के 5.29 किलो मीटर के प्रायरिटी पैकेज आईएसबीटी से एमआर 10 पर कार्य प्रगति पर है। वित्तीय पोषण के लिए भोपाल के लिए यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक और इंदौर के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक और न्यू डेवलपमेंट बैंक के साथ 5.3.2019 और 6.3.2019 को क्रमशः बैठक की गई और इन वित्तीय संस्थाओं ने अपनी सैद्धांतिक सहमति भी दे दी है।

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