मानवीय संवेदनाओं की परीक्षा ले रहा रेमडेसिविर इंजेक्शन, परिजनों की राहत में परेशान दिखे लोग

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मध्यप्रदेश में कोरोना की दवा के संकट के साथ उससे प्रभावित लोगो में भावनाओं का तेज भूचाल आ गया है, कोरोना संक्रमण से पीड़ित व्यक्तियों के परिजन रेमडेसिविर इंजेक्शन के दवा बाजार में हाथ में पैसे होते हुए भी दर-दर भटकने को मजबूर है, उनकी परेशानी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है,  दवा बाजार में बारह सौ दुकाने है और रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए सिर्फ दस दुकाने ही अधिकृत है

वहां भी कोरोना जैसी बीमारी में कारगर माने जा रहे इजेक्शन का न स्टॉक है और ना सप्लाई हो पा रही है भागीरथपूरा में रहने वाले आशीष माली ने एक दिन पहले आठ घंटे लाइन में खड़े रहकर टोकन मिलने के बाद सुबह से अपनी बारी का इंतजार कर रहे है, उनका भीड़ में खड़े रहकर  यह कहना था की उन्हें अपने पिता के लिए इंजेक्शन तो मिल जायेंगे

इंजेक्शन के लिए खड़े लोगों का कहना है की जब प्रशासन को पता है की इतनी भीड़ होने वाली है तो उन्हें टेंट और पेयजल की वयवस्था भी करनी चाहिए थी धुप में खड़े लोगो का हाल बेहाल है, उन्हें मज़बूरी में पानी के कैन से पानी पीना पड़ रहा है जिसके कारण संक्रमण का खतरा भी हो सकता है, नौलखा में लगने वाले हाट में भी 6 लोग पॉजिटिव निकले है और खुदेल में भी एसडीएम सहित आधा दर्जन अधिकारी संक्रमित हो गए है, लगातार बढ़ रहे कोरोना से बचाव के लिए चाचा नेहरू और कैंसर अस्पताल को भी कोविद वार्ड में तब्दील किया अज रहा है यहाँ भी सौ-सौ बिस्तर की वयवस्था है