स्वच्छता अभियान का पहला मॉडल बना अंडमान निकोबार

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नई-दिल्ली। देश में स्वच्छता अभियान को लेकर हर राज्य अपनी अपनी पूरी कोशिश कर रहा है बात अंडमान निकोबार कि करे तो वहाँ अक्सर सुर्खियों में तब आता है जब वहां या तो सुनामी आई हो या फिर भूकंप। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है अंडमान निकोबार अपने स्वच्छता अभियान की वजह से आज चर्चा में है।

जब पूरा देश 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत अभियान का 3 साल मना रहा था और गांधी जयंती मना रहा था तब अंडमान निकोबार द्वीप समूह सचमुच गांधी और भारत के स्वच्छ होने के सपने को अमली जामा पहनाने में जुटा था। पीबीएमसी ने 2016 में शहर में एक सर्वे किया था जिससे पता चला कि खुले में शौच अक्सर गांवों और रिमोर्ट एरिया में होता है। अंडमान की जनसंख्या 1.59 लाख है। सर्वे में पता चला कि 7000 लोगों  के पास टॉयलेट नहीं है जबकि 1600 लोगों के घरों में टॉयलेट की सुविधा नहीं है।

सरकार ने सर्वे करने के बाद  जिन लोगों के घर में बाथरूम नहीं था उन्हें 14000 रुपए दिए। वहीं 48 ऐसे क्षेत्रों का चयन कर जहां खुले में शौच करने जाते थे वहां  256 कम्यूनिटी टॉयलेट बनवाया। अधिकारी ने बताया कि म्यूनिसिपल को 2.5 करोड़ सेंक्शन किया गया था। और अब अंडमान निकोबार पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त द्वीप बन चुका है।

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