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सोलह दिनी श्राद्ध कल से होंगे प्रारंभ, श्राद्ध में यह कार्य है वर्जित

Posted on: 04 Sep 2017 07:31 by Ghamasan India
सोलह दिनी श्राद्ध कल से होंगे प्रारंभ, श्राद्ध में यह कार्य है वर्जित

नई दिल्ली :  श्री गजानन के विसर्जन के साथ ही कल से 5 सितम्बर से सोलह दिनी श्राद्ध प्रारम्भ हो जायेंगे जो पूर्वजो को मोक्ष प्रदान करते है. भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर अश्विन माह की अमावस्या तक के 16 दिन पितृपक्ष के नाम से जाने जाते हैं.

1.श्राद्ध में पितृ के निमित पितृ पक्ष में धार्मिक कर्म उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्धकर्म करके सम्पन्न किए जाते हैं। जो लोग पितृ के निमित श्रद्धा न रखकर श्राद्धकर्म नहीं करते, पितृगण उनसे नाराज होकर उन्हें श्रापित भी करते हैं, इस श्राप को पितृदोष कहा जाता है.

2.श्राद्धकर्ता को पान खाना, तेल लगाना, क्षौरकर्म, मैथुन व पराया अन्न खाना, यात्रा करना, क्रोध करना वर्जित है.

3.श्राद्धकर्म में चना, मसूर, उड़द, कुलथी, सत्तू, मूली, काला जीरा, कचनार, खीरा, काला उड़द, काला नमक, बासी, अपवित्र फल या अन्न निषेध माने गए हैं.

4.श्राद्धकर्म में गाय का दूध, घी व दही ही प्रयोग में लेना चाहिए। भैंस बकरी इत्यादि का दूध वर्जित माना गया है.

5.श्राद्धकर्म में लोहे का उपयोग किसी भी रूप में अशुभ माना जाता है.

6.श्राद्धकर्म तिल का होना आवश्यक है, तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं.

 

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