लोभान एनकाउन्टर मामले में डीआईजी चौधरी का वीरता पदक छीनना तय

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नई दिल्ली : मध्यप्रदेश के झाबुआ में 2002 में हुए डकैत लोभान का एनकाउन्टर किये जाने के बाद तत्कालीन एएसपी धर्मेन्द चौधरी को राज्य शासन की अनुशंषा के बाद राष्ट्रीय सचिवालय द्वारा 2004 में वीरता पदक प्रदान किया गया था, जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा डकैत लोभान के एनकाउन्टर पर आपत्ति लिये जाने के बाद राष्ट्रपति सचिवालय के राष्ट्रपति के ऑफिसर ऑफ स्पेशल ड्यूटी प्रवीण सिद्धार्थ द्वारा पदक रद्द किये जाने की अधिशुचना जारी की जो 2012 के बाद अब सार्वजनिक हुई है’

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के द्वारा यह शक जाहिर किया गया था की डकैत लोभान को पास से गोली मारी गयी थी लेकिन पुलिस का कहना था की डकैत लोभान अपने साथियो के साथ खेत से फायरिंग कर रहा था, जिसके बाद उसके साथी बचकर भाग निकले और पुलिस की क्रास फायरिंग में डकैत लोभान की मौत हो गयी थी.

 हालांकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पुलिस मुख्यालर द्वारा संतुष्ट करने के लिये ताथ्य प्रस्तुत किये गए, जिसके बाद भी राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग ने एनकाउन्टर में झाबुआ के तत्कालीन एएसपी धर्मेन्द्र चौधरी की एनकाउन्टर स्थल पर उपस्थिति और पुलिस के प्रतिवेदनो में विसंगति बताकर राष्ट्रीय सचिवालय को पदक रद्द करने की अनुशंषा करदी थी जिसके बाद राष्ट्रीय सचिवालय ने 21 सिताम्बार को अपना फैसला सुनाया था.

 

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