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‘‘न संघ भाजपा को चलाता है, न ही भाजपा संघ को’’, कांग्रेस ने कसा तंज

Posted on: 13 Sep 2017 16:45 by Ghamasan India
‘‘न संघ भाजपा को चलाता है, न ही भाजपा संघ को’’, कांग्रेस ने कसा तंज

नई दिल्ली :  प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता श्री के.के. मिश्रा ने मंगलवार को नई दिल्ली में 50 देशों के दूतावास कर्मियों के साथ संपन्न संवाद के दौरान आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत के उस कथन ‘‘न संघ भाजपा को चलाता है, न ही भाजपा संघ को’’ पर तंज कसते हुए कहा है कि संघ प्रमुख का उक्त कथन इस सदी का संघ द्वारा देश के साथ किया गया दूसरा सबसे बड़ा भद्दा मजाक है! इसके पूर्व देश में घटित विभिन्न बम विस्फोटों की घटनाओं में संघ प्रचारकों के नाम आने पर श्री भागवत ने यह कहकर देश को चौंका दिया था कि संघ में कुछ कट्टरवादी घुस आये थे, जिन्हें हमने संघ से निकाल दिया है. जबकि, संघ के 92 वर्षों के कार्यकाल में उसका न तो पंजीकरण है और न ही उसकी सदस्यता बही। जब एक अपंजीकृत संस्था की सदस्यता बही ही नहीं है, तो संघ प्रमुख ने उन्हें कैसे, कहां और किस रिकार्ड से हटाया था?

श्री मिश्रा ने कहा कि ‘न संघ भाजपा को चलाता है, न ही भाजपा संघ को’, संघ प्रमुख द्वारा देश के सामने परोसे गये इस झूठ और दिये गये धोखों को लेकर अब यह सार्वजनिक करना चाहिए कि यदि संघ भाजपा को नहीं चलाता है, तो संघ प्रमुख देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, उनके मंत्रीमण्डल, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रि-परिषद के सदस्यों के रिपोर्ट कार्डों को लेकर उनकी बैठकें किस हैसियत से लेते हैं, प्रधानमंत्री से लेकर केन्द्र-राज्यों के मुख्यमंत्री व उनके मंत्रीमंडलीय सहयोगी एक अपंजीकृत संस्था के प्रमुख द्वारा आयोजित ऐसी अवैध बैठकों में हिस्सा क्यों, किसलिए और किसके दबाव में लेते हैं, जबकि उन्होंने भारतीय संविधान की रक्षा की शपथ ली हुई होती है? यह असंवैधानिक कृत्य भाजपा शासित सरकारों का संघ के समक्ष किये जाने वाला आत्म समर्पण है या संघ के रिमोट से उन्हें संचालित किये जाने का स्पष्ट प्रमाण?

श्री मिश्रा ने 50 विभिन्न देशों के दूतावास कर्मियों के साथ किये गये संवाद को भी अवैधानिक बताते हुए कहा है कि विभिन्न देशों के दूतावास कर्मियों से किये गये संवाद को लेकर क्या अपंजीकृत संस्था के प्रमुख श्री भागवत ने केंद्र सरकार से अनुमति ली, यदि उन्हें इस बाबत अनुमति मिली तो क्या वह वैधानिक थी और यदि नहीं तो उन्होंने, उन्हें किस हैसियत से संवाद हेतु आमंत्रित किया?

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