न मुहूर्त, न फेरे, पसंद आने पर खिलाया पान और हो गई शादी

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नई दिल्ली। शादी के लिए माता-पिता अपने बच्चो की शादी के लिए वर-वधु ढूंढते हैं। फिर कुंडली मिलान करके पूरी रस्मो-रिवाजो के साथ शादी की जाती है। लेकिन हरदा जिले के मोरगढ़ी में आदिवासी समाज में ऐसा नहीं है। यहाँ लगे एक मेले में लड़का-लड़की एक दुसरे को पसंद करते है और उसके बाद पान खिलाया और हो गई शादी यानी पान खिलाने के बाद युवक-युवती को अपने साथ घर ले जाता है।

इस मेले को खाटिया मेले के नाम से जाना जाता है। यह मेला हर साल लगता है। हरदा जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर मोरगढ़ी में रविवार को एक ऐसा ही मेला लगा। यह मेला दीपावली के ठीक बाद लगने वाले साप्ताहिक बाजार के दौरान लगता है मेले में कई किमी दूर से युवक-युवती पैदल चलकर आते हैं।

शादी के  कुछ दिनों बाद जब दोनों के परिवार आपस में मिलते है तो वधु पक्ष, वर पक्ष से दहेज लेता है। मेले में आई वृद्घ आदिवासी महिला पुनिया बाई बताती हैं कि यह वर्षों पुरानी परंपरा है। लड़की वाले ही लड़के वालों से दहेज की मांग करती है। मुन्ना आदिवासी ने बताया कि इस मेले में अब तक जिनकी भी शादी हुई है, उनके बीच कभी ऐसा कोई विवाद नहीं हुआ कि मामला कोर्ट कचहरी या थाने पहुंचे।

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