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नवरात्र स्पेशल : माता के दो चमत्कारी सिद्धपीठ की अद्भुत कथा

Posted on: 25 Sep 2017 08:44 by Ghamasan India
नवरात्र स्पेशल : माता के दो चमत्कारी सिद्धपीठ की अद्भुत कथा

नई-दिल्ली। रुड़की के एक चुड़ियाला गांव स्थित प्राचीन सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी मंदिर में नवरात्रों के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। क्षेत्रवासियों के अलावा दूर दराज से श्रद्धालु आकर मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर माता के दर्शन कर मन्नतें मांगते हैं।

मंदिर के पुजारी के अनुसार यह प्राचीन मंदिर माता के 52 सिद्धपीठ में से एक है ऐसी मान्यता है। की पुत्र प्रप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति मंदिर में आकर माता के चरणों से लोकड़ा (लकड़ी का गुड्डा) चोरी करके अपने साथ ले जाते हैं तो  पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है

यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। गांव की प्रत्येक बेटियां भी विवाह के पश्चात पुत्र प्राप्ति के बाद लोकड़ा चढ़वाना नहीं भूलती है। यहां के बारे में कहा जाता है माता सती का चूड़ा इस घनघोर जंगल में गिर गया था। इस मान्यता के साथ यहां माता की पिंडी स्थापित हो गई

स्‍‌थानीय निवासी बताते हैं कि एक बार लंढौरा रियासत के राजा जंगल में शिकार करने गए थे। जंगल में घूमते-घूमते उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। राजा के यहां कोई पुत्र नहीं था। राजा ने उसी समय माता से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी। पुत्र प्राप्ति के बाद राजा ने सन् 1805 में मंदिर का भव्य निर्माण कराया। देवी के दर्शनों के लिए उपस्थित हुई रानी ने माता शक्ति कुंड की सीढ़ियां बनवाई। जहां आज भव्य मंदिर बना हुआ है। यहां घनघोर जंगल हुआ करता था। जहां शेरों की दहाड़ सुनाई पड़ती थी। पुराने जानकार बताते हैं कि माता की पिंडी पर रोजाना शेर भी मत्था टेकने के लिए आते थे।

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