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नवरात्र के छठे दिन करें देवी कात्यायनी का पूजन..

Posted on: 26 Sep 2017 06:25 by Ghamasan India
नवरात्र के छठे दिन करें देवी कात्यायनी का पूजन..

नई दिल्ली : आज नवरात्रि के छठे दिन दुर्गा के स्वरूप में देवी कात्यायनी बृहस्पति ग्रह पर अपना आधिपत्य रखती हैं। कात्यायनी का स्वरुप उस अधेड़ महिला या पुरुष की तरह है जो परिवार में रहकर अपनी पीढ़ी का भविष्य संवार रहे हैं।

महर्षि कत के गोत्र में उत्पन्न होने व महर्षि कात्यायन की पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप को कात्यायनी नाम मिला। श्रीकृष्ण को पतिरूप में पाने हेतु ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा कालिन्दी-यमुना के तट पर की थी। आज भी अच्छे और मन भावन पति की इच्छा से कुंवारी लड़कियां इनका व्रत रखती हैं।

वास्तुपुरुष सिद्धांत के अनुसार इनकी दिशा उत्तरपूर्व है अतः निवास में बने वो स्थान जहां पर देवालय, अंडरग्राउंड वाटर टेंक व बोरवेल हो। इनकी पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय हैं गौधूलि व इनकी पूजा पीले फूलों से करनी चाहिए। इन्हें बेसन के हलवे का भोग लगाना चाहिए व श्रृंगार में इन्हें हल्दी अर्पित करनी चाहिए।

देवी कात्यायिनी की साधना उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जिनकी आजीविका का संबंध अध्ययन, लेखापाल या कर विभाग से है। इनकी साधना से दुर्भाग्य से छुटकारा मिलता है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है व दुश्मनों का संहार होता है।

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