नवरात्र के आखिरी दिन करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, मिलेगा हर सुख..

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नई दिल्ली : नवरात्र के अंतिम दिन यानी नवमी पर नवदुर्गा के नवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। ये देवी केतु ग्रह पर अपना आधिपत्य रखती हैं। सिद्धिदात्री का स्वरुप उस देह त्याग कर चुकी आत्मा का है, जिसने जीवन में सर्व सिद्धि प्राप्त कर स्वयं को परमेश्वर में विलीन कर लिया है।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व व वशित्व यह आठों सिद्धियां सिद्धिदात्री से ही उत्तपन हैं। महादेव ने इन्हीं के ही मिलकर सर्व सिद्धियों को प्राप्त कर अर्धनारीश्वर रूप लिया था।

शास्त्रनुसार परम सौम्य चतुर्भुजी देवी सिद्धिदात्री अपनी ऊपरी दाईं भुजा में चक्र धारण का संपूर्ण जगत का जीवनचक्र चलती है। नीचे वाली दाईं भुजा में गदा धारण कर दुष्टों का दलन करती हैं।  देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक और गृहस्थ आश्रम में जीवनयापन करने वाले भक्त सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं।

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