देवउठनी एकादशी कल जानें पूजन विधि और मुहर्त

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नई दिल्ली।  कार्तिक शुक्ल ग्यारस के उपलक्ष्य में देवउठनी एकादशी अर्थात प्रबोधिनी एकादशी मनाई जाएगी। इस का एक नाम देवउठनी ग्यारस भी है इसके पीछे मान्यता है कि देवसोनी ग्यारस को देव शयन करते हैं व देवउठनी एकादशी के दिन उठते हैं। अतः इसे देवोत्थान कहते हैं। इस दिन विष्णु क्षीर सागर में निंद्रा अवस्था से चार माह के उपरांत जागते हैं। विष्णु के शयन के चार माह में सभी मांगलिक कार्य निषेध होते हैं। हरि के जागने के बाद ही मांगलिक कार्य शुरू होते हैं।

विशेष पूजन विधि: भगवान विष्णु का षोडशोपचार पूजन करें। गौघृत में सिंदूर मिलाकर 11 दीपक करें, 11 केले, 11 खजूर, और 11 गोल फल चढ़ाएं। गूगल धूप करें, कमल का फूल चढ़ाएं व रोली चढ़ाएं। घी-गुड़ का भोग लगाएं तथा तुलसी की माला से इस विशेष मंत्र से 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग किसी ब्राह्मण को दान करें।

पूजन मुहूर्त: दिन 11:42 से दिन 12:26 तक।
पूजन मंत्र: ॐ श्रीमहाविष्णवे देवदेवाय नमः॥

उपाय
दरिद्रता के नाश हेतु पीली सरसों सिर से वारकर श्रीहरि के समीप कर्पूर से जला दें।
पारिवारिक भग्यौदय हेतु केले के पेड़ का पूजन करके उसकी 365 परिक्रमा लगाएं।
दुर्भाग्य से मुक्ति के लिए शालिग्राम जी का शहद से अभिषेक करें।

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