दक्षिण भारत से नहीं इंडोनेशिया या अरब से आई है यह डिश

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नई दिल्ली। सुबह नाश्ते में हम कुछ-हल्का-फुल्का चाहते है और इस दौरान हमारे मन में सबसे पहला विचार इडली साम्भर का अता है। भाप में पकाया हुआ यह व्यंजन गोल आकार वाला, बेहद मुलायम तथा हल्का होता है। इडली को गर्म सांभर और नारियल की चटनी के साथ परोसा जाता है। हम जानते है कि यह दिश दक्षिण भारत की है लेकिन इडली दक्षिण भारतीय व्यंजन नहीं है।

व्यंजन इतिहासकारों का मानना है कि यह रेसेपी इंडोनेशिया से या अरब व्यापारियों के जरिए भारत आई है। ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि इडली गोल होती है। लेकिन ऐसा नहीं है, इसे विभिन्न आकार में बनाया जा सकता है और सांभर और चटनी के अलावा भी अन्य व्यंजनों के साथ भी परोसा जा सकता है।

चेन्नई के ताज कोरोमांडेल होटल के कार्यकारी शेफ सुजान मुखर्जी ने बताया, ‘तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों ही राज्य यह दावा करते हैं कि इन्होंने इस व्यंजन को बनाने की कला दुनिया को सिखाई है।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन हममें से कई लोगों को जानकर आश्चर्य होगा कि इडली की उत्पत्ति दक्षिण भारत में नहीं हुई है। ऐसा माना जाता है कि इस व्यंजन को इंडोनेशिया में शासन करने वाले हिंदू राजा के रसोइयों ने बनाया था। ‘

वहीं इडली पर दूसरा दावा अलग है. कुछ व्यंजन इतिहासकारों का मानना है कि अरब व्यापारियों ने दक्षिण भारत के लोगों का इडली से परिचय कराया था ,जो व्यापार के लिए लगातार दक्षिणी तट पर आते-जाते रहते थे। शेफ ने बताया कि दुनियाभर में इडली काफी विविधता वाला व्यंजन है. इसमें कांचीपुरम इडली (इस पर काली मिर्च और नारियल छिड़का जाता है) और रामेसरी इडली (यह केरल का सपाट और मुलायम इडली) काफी लोकप्रिय है।

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