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जींस के कारखाने से सरस्वती नदी हो रही प्रदूषित, नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं

Posted on: 07 Jun 2018 12:40 by Praveen Rathore
जींस के कारखाने से सरस्वती नदी हो रही प्रदूषित, नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं

इंदौर। एक ओर जहां एनजीटी के निर्देश पर शहर की दो नदियों कान्ह और सरस्वती की सफाई के लिए नगर निगम करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है वहीं कुछ उद्योगपति खुलेआम अपने कारखानों का गंदा पानी इन नदियों में छोडक़र नदी को प्रदूषित कर रहे हैं। ताजा मामला बिजलपुर स्थित जींस की पेंट बनाने वाले कारखाने का सामने आया है।

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आदेश के बावजूद नहीं कटा बिजली कनेक्शन
गौरतलब है कि इस कारखाने की शिकायत के बाद मई में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने मौका मुआयना किया था, जिसमें शिकायत सही पाई गई और कारखाने का गंदा पानी नदी में फेंकने का मामला सामने आया। विभाग ने उक्त उद्योगपति को नोटिस जारी कर सुनवाई का मौका भी दिया, लेकिन उसने नोटिस का जवाब देकर इतिश्री कर ली। उद्योग द्वारा दिए गए जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं होने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उक्त कारखाने की बिजली कनेक्शन काटने और प्रदूषण नहीं फैलाने का निर्देश दिया था, लेकिन इस निर्देश को भी ताक पर रख दिया गया। निर्देश के बावजूद आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

रोज फेंक रहे नदी में गंदा पानी
बताया जाता है कि बिजलपुर में सांईकृपा क्लीनिंग एंड वाशिंग के नाम से जींस का कारखाना है, जहां जींस के कपड़े की क्लीनिंग एवं धुलाई होती है, जिसमें केमिकल का उपयोग होता है और प्रदूषित पानी को कारखाने के पीछे बह रही नदी में फेंका जा रहा है, जिससे नदी प्रदूषित हो रही है। उद्योग के संचालक जितेंद्र गोयल हैं, जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश और नोटिसों की भी परवाह नहीं करते हुए निरंतर कारखाने का संचालन कर रहे हैं। इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आर के गुप्ता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

मई में जारी हुए थे आदेश
उक्त मामले में मेसर्स सांई क्लीनिंग एंड वाशिंग प्लॉट नंबर 107-108 सोनी गार्डन परिसर, बिजलपुर को नोटिस क्रमांक 1589 दि. 9-5-2017 को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया था। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहा और आदेश ताक पर रख कारखाने का संचालन जारी है। मामले में जल प्रदूषण नियंत्रण की धारा 13 (क) एवं वायु प्रदूषण निवारण अधिनियम 1981 की धारा 31 के तहत विभाग ने आदेश दिए थे।

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