जानिए नरक चतुर्दशी से जुड़ीं कथा और महत्व

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इस संबंध में एक पौराणिक कथा भी प्रसिद्ध है
एक दिन मृत्यु के देवता यमराज के मस्तिष्क में विचार आया कि मेरे आदेश पर मेरे दूत किसी के भी प्राण हर लेते हैं, क्या कभी उन्हें किसी पर दया नहीं आती तथा किसी नौजवान के प्राण हरण करने पर उनका मन नहीं पसीजता?

विचार मन में आते ही यमराज ने अपने दूत को बुला कर उक्त प्रश्न किया। यमदूत ने कहा कि एक बार हंस नामक राजा के घर में जब पुत्र हुआ तो ज्योतिषियों की भविष्यवाणी थी कि विवाह के चार दिन बाद राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। राजा ने विचार किया कि वह राजकुमार का विवाह ही नहीं करेंगे। राजा ने इसी मंशा से राजकुमार को जंगल में स्थित एक महात्मा की कुटिया में भेज दिया परंतु होनी को कोई टाल नहीं सकता।

एक दिन हंस नाम के राजा की रूपवती कन्या रास्ता भूलकर वहां आ गई। राजकुमार ने उसके साथ गन्धर्व विवाह कर लिया। विवाह के चार दिन बाद ही राजकुमार की मृत्यु हो गई। जब राजकुमारी पति की मृत्यु पर विलाप कर रही थी तो यमदूत का दिल पसीज गया था। उसने यमराज से कहा कि इस तरह की जवान मौत से बचने का क्या कोई उपाय है?

यह प्रश्न सुनकर यमराज ने कहा कि जो व्यक्ति कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन मेरे नाम का दीपक सच्चे मन से जलाएगा, उसके परिवार में कभी अकाल और जवान मृत्यु नहीं होगी। इसी कारण धनतेरस की रात को यम दीपक जलाया जाता है।

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