जानिए क्यों ‘शरद पूर्णिमा’ के दिन चांदनी में रखी जाती है खीर..

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नई दिल्ली : आज 5 अक्टूबर को ‘शरदपूर्णिमा’ महोत्सव मनाया जाएगा। आज शहर के कई मंदिरों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कहीं भजन होंगे तो कहीं भगवान का अद्भुत शृंगार होगा। शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है तथा कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है, इस दिन दान और स्नान का विशेष महत्व होता है।

मान्यता के अनुसार इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और जो जाग रहा होता है वहां ठहरती हैं। कुछ लोग इस दिन कोजागरी व्रत रखते हैं। इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन धन वैभव बढ़ाने के लिए मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा भी की जाती है।

इस दिन लक्ष्मीजी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन मां लक्ष्मी को चांदी का चौकोर टुकड़ा चढ़ाकर फिर उसे अपने पास सालभर रखने से धन की वृद्धि होती है। इस दिन माता महालक्ष्मी एवं कुबेर आदि का पूजन किया जाना शुभफलदायक होता है। इस दिन गाय के दूध की खीर बनाकर माता लक्ष्मी एवं कुबेर को अर्पित कर चांदनी रात में घर के बाहर या छत पर सिद्ध करने के लिए रखी जाती है।

इसके बाद सुबह पूरे परिवार में इसे प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है। इस दिन खीर को महीन सूती कपड़े या चलनी से अच्छी तरह ढककर रात को चंदा की रोशनी में रख दिया जाता है। चांदनी में रखी इस खीर को खाने से रोगों से मुक्ति मिलती है।

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