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गिरिराज परिक्रमा करने वाले दिग्गी अब नर्मदा यात्रा पर..

Posted on: 02 Sep 2017 06:30 by Ghamasan India
गिरिराज परिक्रमा करने वाले दिग्गी अब नर्मदा यात्रा पर..

इंदौर। दिग्विजय राजनीति के जितने माहिर खिलाड़ी हैं उतने ही वे अभ्यासी (प्रैक्टिसिंग) हिन्दू हैं। उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी से गुरु दीक्षा ली और आज भी वे गुरु की आज्ञा का अक्षरश: पालन करते हैं। उनमें ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्ति योग का अद्भुत समन्वय है। उनके राघौगढ़ किले में 7 मंदिर हैं जिनमें से 3 मंदिरों में अखंड ज्योत अनवरत जलती रहती है। एक राघौ जी महाराज का भव्य मंदिर है।

यदि दिग्विजय या उनके विधायक बेटे जयवर्द्धन सिंह राघौगढ़ में रहते हैं तो किले से बाहर तब तक नहीं जाते हैं जब तक वे भगवान् राघौ जी यानी प्रभु श्री राम के दर्शन नहीं कर लें। इनमे से प्रायः सभी बातें लोगों को मालूम होंगी लेकिन एक बात जो मैं आपको अब बता रहा हूँ वो बहुत कम लोगों की जानकारी में होगी। दिग्विजय ने नंगे पैर, लगातार कई वर्षों तक गिरिराज जी की परिक्रमा की, वो भी एक हाथ में दूध की बाल्टी पकड़े हुए और दूसरे हाथ से गिरिराज जी के श्री चरणों में दूध अर्पित करते हुए। श्री गिरिराज जी की सम्पूर्ण परिक्रमा सात कोस (21 किमी) की है, जो एक ही दिन में पूरी की जाती है। ये उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति और सनातन धर्म के प्रति प्रगाढ़ आस्था का सबसे बड़ा उदहारण है।

दिग्विजय जितने कठोर सनातन धर्म का पालन करने वाले हैं तो उतने ही वे सभी धर्मों के प्रति उदार हैं । वे कहते हैं सभी धर्म समान हैं सभी को उनके धर्मों के पालन का अधिकार है। उनकी दूसरे धर्मों के लोगों के प्रति इसी उदारता को आरएसएस और बीजेपी ने पूरे देश में उन्हें प्रो-मुस्लिम करार दे दिया जबकि हमारा संविधान कहता है कि सभी धर्मों को समानता का अधिकार है, हमारा देश धर्म-निरपेक्ष है।

मैं व्यक्तिगत रूप से दावे के साथ कह सकता हूँ कि दिग्विजय जितने पक्के अभ्यासी हिन्दू हैं उतने शायद ही विश्व हिन्दू परिषद्, आरएसएस और भाजपा सहित किसी भी राजनैतिक दल के नेता होंगे। आज दिग्विजय मध्यप्रदेश के अकेले ऐसे नेता हैं जो पूरे मध्यप्रदेश के लगभग सभी जिलों के छोटे-बड़े नेताओं और ग्राम पंचायत स्तर के बहुत से लोगों को नाम से पुकारते हैं। अद्वितीय प्रतिभा के धनी हैं हम सबके दिग्गी राजा।

दिग्विजय, आगामी 30 सितम्बर’17 को अश्विन माह की दशमी के पवित्र दिन से सिद्धि दायिनी माँ नर्मदा की सम्पूर्ण परिक्रमा करने जा रहे हैं जो लगभग 3300 किलोमीटर की है। ये जान लीजिये कि अपनी गाँव-गाँव में पकड़ रखने वाले दिग्विजय इस परिक्रमा के दौरान नर्मदा तटीय क्षेत्रों के अपने पुराने साथियों से तो मिलेंगे ही, साथ ही साथ उन नए युवाओं से भी संपर्क करेंगे जो जीवन दायिनी माँ नर्मदा जी की स्वच्छता में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

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