आरुषि हत्याकांड: जानिए क़त्ल से जुड़ी अदालती कार्यवाही का ब्योरा

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नई दिल्ली। 2008 में नोएडा में हुए दोहरे हत्याकांड ने देश को झाक्झोर कर रख दया है। इस केस को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट आज आरुषि के माता-पिता डॉ. राजेश और नुपुर तलवार की अपील पर अहम् फैसला सुनाएगा। गौरतलब है कि सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर, 2013 को राजेश और नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आईए जानते है इस क़त्ल से जुडी अदालती कार्यवाही का ब्योरा-

16 मई 2008: नोएडा के जलवायु विहार स्थित अपने घर के बेडरूम में 14 वर्षीय आरुषि तलवार का शव मिला था। उसका गला कटा हुआ था. हत्‍या का शक घरेलू नौकर हेमराज पर आया।

17 मई 2008: हेमराज का शव तलवार दंपति के घर की छत पर मिला।

23 मई 2008: आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार को उत्‍तर प्रदेश पुलिस ने आरुषि और हेमराज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

1 जून 2008: मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में सौप की गई।

13 जून 2008: जांच के दौरान डॉ. राजेश तलवार के कम्पाउंडर कृष्णा तलवार दंपति की दोस्त अनीता दुर्रानी के नौकर राजकुमार और तलवार के पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। तीनों को दोहरे हत्याकांड के आरोपी बने।

12 जुलाई 2008: राजेश तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल से जमानत पर रिहा किया गय।

12 सितंबर 2008: कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को निचली अदालत से जमानत मिल गई।

10 सितंबर 2009: आरुषि हत्याकांड की जांच के लिए CBI द्वारा दूसरी टीम बनाई गई।

29 दिसंबर 2010: सीबीआई ने मामले में आरुषि हत्याकांड में अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दायर की।

25 जनवरी 2011: सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ राजेश तलवार ने निचली अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की।

9 फरवरी 2011: निचली अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने आरुषि के माता-पिता राजेश और नुपुर तलवार को हत्या और साक्ष्‍य मिटाने का दोषी माना।

21 फरवरी 2011: डॉ. राजेश और नुपुर तलवार ने ट्रायल कोर्ट के समन को रद्द करवाने के लिए हाइकोर्ट का रुख किया।

18 मार्च 2011: हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की तलवार के अनुरोध को खारिज कर दिया और उन पर कार्यवाही शुरू करने को कहा।

19 मार्च 2011: तलवार दंपति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसने उनके खिलाफ ट्राइल को स्टे कर दिया गया।

6 जनवरी 2012: सुप्रीम कोर्ट ने तलवार की अर्ज़ी खारिज की और ट्रायल शुरू करने की इजाजत दी।

11 जून 2012: गाजियाबाद में विशेष सीबीआई जज एसलाल के सामने ट्रायल शुरू हुआ।

10 अक्टूबर 2013: मामले में अंतिम जिरह शुरू हुई, जिसके बाद 25 नवंबर को गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने तलवार दंपति को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

जनवरी 2014: राजेश और नूपुर तलवार ने निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।

11 जनवरी 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित किया।

1 अगस्त 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार की अपील दुबारा सुनेंगे, क्योंकि सीबीआई के दावों में विरोधाभास हैं।

8 सितंबर 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि हत्याकांड मामले में फैसला सुरक्षित किया।

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