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अटल जी के पैर छूते थे दिग्विय सिंह..

Posted on: 05 Sep 2017 05:18 by Ghamasan India
अटल जी के पैर छूते थे दिग्विय सिंह..

इंदौर : देश में कुछ ही ऐसे नेता हैं जिनको हर दल और तबके के लोग पसंद करते हैं जो दलगत राजनीति से ऊपर हो जाते हैं। अगर हम भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो पहला और आखिरी नाम एक ही आता है वो है अटल बिहारी वाजपेयी जी, जो सर्वमान्य नेता थे जिन्होंने गुजरात दंगों में अपनी पार्टी लाइन से हटकर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को कह दिया था कि आपने राजधर्म का पालन नहीं किया। ऐसे अटल जी और मध्यप्रदेश के सर्वमान्य नेता दिग्विजय सिंह जी के आपस में बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। दिग्विजय सिंह जी उनके पैर छूते थे उनका जबरदस्त सम्मान करते थे। भले ही प्रधानमंत्री के तौर पर अटल जी ने तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार को आवश्यकता अनुसार योजनाओं को वित्तीय सहायता न दी हो, लेकिन कभी भी दिग्विजय सिंह जी ने अटल जी के सम्मान में कोई कमी नहीं आने दी।

मैं आपको इसीलिए बता रहा हूँ कि दिग्विजय सिंह जी ने राजनीति में नई इबारत लिखने की कोशिश की वे विरोधी दल के नेताओं को दुश्मनों की नज़र से नहीं देखते थे उनका हमेशा समानता का भाव था वे कहते थे आखिर हम सभी लोग एक ही प्रदेश-देश के वासी हैं फिर दुश्मन कैसे हो सकते हैं । दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में जितने काम सत्ता पक्ष के विधायकों के होते थे उतने ही काम विपक्षी दल के विधायकों के भी होते थे। आज की राजनीति की तरह नहीं कि रायसेन जिले के एक विधायक व मंत्री ने ये तक कर दिया कि जिन गाँवों से भाजपा को वोट नहीं मिली तो उस गाँव पहुँचने वाली पानी की पाइप लाइन उखड़वा दी, बिजली के ट्रांसफार्मर हटवा दिए।

और ये लोग यहां तक नहीं रुकते इन्होंने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को ढूंढ ढून्ढ कर उनके खिलाफ झूठे प्रकरण दर्ज़ करवा दिए ताकि वे कभी भी कांग्रेस पार्टी का काम न कर सकें। कम से कम दिग्विजय सिंह जी ने अपने शासन काल में ऐसा दुर्व्यवहार न बीजेपी के नेताओं के साथ किया और न ही कार्यकर्ताओं के साथ। हमने तो यहां तक सुना है कि अभी भोपाल में एक ऐसे विधायक हैं जिनकी शादी कराने तक के पैसे दिग्विजय सिंह जी ने व्यक्तिगत रूप से दिए थे जबकि वे उस वक़्त बीजेपी के सामान्य कार्यकर्ता ही रहे होंगे।

दिग्विजय सिंह जी की मंशा सिर्फ इतनी थी कि राजनैतिक लड़ाई की वजह से कोई तबका विकास से अछूता न रह जाए। एक ओर एक सोच सभी का काम करने की थी और दूसरी ओर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाल ही में भोपाल में अपनी सरकार के मंत्रियों को कह गए कि कांग्रेस के लोगों के कोई काम मत करो जब वे परेशान हो जाएँ तो उन्हें बीजेपी में शामिल करो। ये नफरत की राजनीति सिर्फ लोगों को नहीं तोड़ रही, ये देश में समानता फैलाने वाली उस भावना और विचारधारा को भी तोड़ देना चाहती है जो देश को जोड़ने का हर संभव प्रयास कर रही है।

ये दिग्विजय सिंह जी की विशाल हृदयता और उदारता ही थी कि वे मुख्यमंत्री रहते हुए भी सभी को एक ही नज़र से देखते थे। आज भी उनके व्यवहार में किंचित मात्र भी अंतर नहीं आया। मैंने आपको ये किस्से इसीलिये सुनाएँ कि मुझे ये सुनकर बुरा लग रहा है कि बीजेपी के वही विधायक जो सर से लेकर पाँव तक दिग्विजय सिंह जी के अहसानों से दबे हैं वे दिग्विजय सिंह जी द्वारा की जाने वाली नर्मदा परिक्रमा को ढोंग बता रहे हैं। मैं विश्वास और दावे के साथ कह सकता हूँ कि किसी बीजेपी नेता ने आज तक इतनी धार्मिक यात्राएं नहीं की होंगी जितनी दिग्विजय सिंह जी कर चुके हैं।

लोग कुछ भी कहें अब ये निश्चित हो चुका है कि दिग्विजय सिंह जी इसी महीने की 30 तारीख से नरसिंहपुर में स्थित नर्मदा जी के दक्षिण तट के बरमान घाट से अपनी 3300 किलोमीटर लंबी पैदल परिक्रमा का शुभारंभ करेंगे।

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