हिसार में तीन विधायक माताओं के पुत्र सांसद बनने की कतार में | Three Legislators in Hissar in line to become MP

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साढ़े छह सौ साल पुराना तुगलक वंश के शासक फिरोज शाह तुगलक द्वारा स्थापित हिरास एक फिरोजा की पहचान अब इस्ताप नगरी के रूप में है। देश के मीडिया मुगल सुभाष चंद्रा और इस्पात उद्योग के साथ कई उद्योगों में खासा दखल रखने वाले नवीन ओमप्रकाश जिंदल इसी नगरी से हैं। इतना ही नहीं अग्रवाल समाज के संस्थापक महाराजा अग्रसेन की राजधानी अग्रोहा भी यहीं है। बहरहाल, अभी चर्चा सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव की है तो यहां तीनों उम्मीदवार स्थापित राजनीतिक घरानों से है और तीनों की माताएं विधायक हैं।

यहां भारतीय जनता पार्टी के सांसद बीरेंद्र सिंह ने अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अपने पुत्र बृजेंद्र सिंह को टिकट दिलाया है। इसके लिए दोनों पिता पुत्र को काफी त्याग करना पड़ा। पिता ने केंद्रीय मंत्री पद के साथ ही राजनीति में संन्यास लेने की मुनादी कर सीट का भी त्याग किया। वहीं बेटे ने भी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की नौकरी त्यागकर सियासत का दामन थामा। पिता-पुत्र ने राजनीतिक कैरियर को बनाए रखने व आगे बढ़ाने के लिए सारी शक्ति लगा रहे हैं। हरियाणा के तीन लालों में से एक भजनलाल के परिवार की चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधि भव्य विश्नोई यहां से उम्मीदवार हैं। वे राज्य के दिग्गज नेता कुलदीप विश्नोई के बैटे हैं।

वैसे भी भजनलाल की कोठी हिसार में ही है। राजनीतिक मुकाबले का तीसरा कोण है चौधरी देवीलाल के कुनबे की इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलोद) को छोड़कर अपनी पार्टी का गठन करने वाले सांसद दुष्यंत चौटाला। वे देवीलाल के पोते अजय चौटाला के पुत्र हैं यानी कुनबे की चौथी पीढ़ी के सदस्य हैं औरर इस परिवार को चुनावी हार का सामना अपवाद स्वरूप ही झेलना पड़ा है। वे सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी और सत्ताच्युत कांग्रेस के मुकाबले अपने द्वारा पांच साल में कराए गए विकास कार्यों के सहारे चुनाव अभियान की नाव को आगे बढ़ा रहे हैं। राजनीतिक लिहाज से यह सीट जाट बहुत मानी जाती है। मोदी और राहुल फेक्टर का यहां कितना असर है इसकी परीक्षा होना बाकी है। भाजपा को जहां खट्टर सरकार के कार्यों का भरोसा है वहीं कांग्रेस को यहां के बिगड़े हालातों से उम्मीद है कि लोग फिर उसे ही चुनेंगे।

पार्टियों से इतर मामला तीन राजनीतिक घरानों का है। तीनों ही अपनी-अपनी साख बनाए रखने के लिए चुनाव जीतना चाहते हैं और इसके लिए कोई कोर-कसर छोड़ेंगे इसमें शक है। अब मतदाताओं के मन में क्या है इसके लिए तो नतीजों का ही इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि चुनाव अभियान के दौरान किसी तरह का कोई माहौल नजर नहीं आया।

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