नई दिल्ली : हाफिज सईद और उसके संगठनों को आतंकी सूची में डालने के बावजूद पाकिस्तान का बचना आसान नहीं होगा। अमेरिका और ब्रिटेन ने आतंकी फंडिंग के लिए पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ‘एफएटीएफ’ में निगरानी सूची में डालने का प्रस्ताव पेश किया है। यही नहीं, फ्रांस और जर्मनी इसके समर्थन में उतर आया है।

जबकि निगरानी सूची में आने के बाद पाकिस्तान के लिए दूसरे देशों से कर्ज लेने या व्यापार करने में मुश्किल आएगी। ध्यान देने की बात है कि एफएटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों व व्यक्तियों के वित्तीय लेन-देन पर रोक नहीं लगाने का दोषी बताया था।

हालाँकि पाकिस्तान में डर साफ देखा जा सकता है। जबकि हाफिज सईद और उसके संगठनों को आतंकी सूची में डालने के पाकिस्तान के फैसले को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है। लेकिन इस बार पाकिस्तान के लिए एफएटीएफ से बचना आसान नहीं होगा।

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