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सोशल मीडिया के भरोसे होगा लोकसभा चुनाव | Social Media will play a crucial role in the 2019 LS Elections

Posted on: 18 Mar 2019 13:49 by Surbhi Bhawsar
सोशल मीडिया के भरोसे होगा लोकसभा चुनाव | Social Media will play a crucial role in the 2019 LS Elections

विज्ञापन, मार्केटिंग और ब्रांडिंग के विशेषज्ञ वीरेंद्र गुप्ता बता रहे हैं, किस तरह सोशल मीडिया पर युद्ध की तरह लडे जायेंगे 2019 के लोकसभा चुनाव

2019 के आम चुनावों की तारीख करीब आने के साथ ही राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार ने गति पकड़ना शुरू कर दी है। विज्ञापन पर खर्च के मामले में इस साल के चुनाव किसी फेस्टिव सीजन से भी बड़े दिखते हैं। विज्ञापन उद्योग के सूत्रों के अनुसार इस वर्ष होने वाले आम चुनावों में राजनीतिक विज्ञापन खर्च पिछले लोकसभा चुनावों से लगभग दोगुने से भी अधिक होने की उम्मीद है, जिसका बड़ा हिस्सा भाजपा, कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, तेदेपा, अकाली दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीडीएस) और अन्य क्षेत्रीय दलों का होगा।

सरकारी विज्ञापन खर्च बढ़ा

विज्ञापन क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, 2014 तक हर साल सरकार का औसत विज्ञापन खर्च लगभग 600 करोड़ रुपये था, लेकिन अब यह सालाना 1,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। इस साल प्रचार पर कुल सरकारी विज्ञापन 1,500 करोड़ रुपये का है, जो आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए और बढ़ने जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इन विज्ञापनों का एक बड़ा हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर जा रहा है।

भारतीय मीडिया का विस्तार

यह चुनाव अब तक के चुनावों की तुलना में सबसे अधिक महंगा होने जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय मीडिया पिछले पांच वर्षों में अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। बड़ी संभावना इस बात की भी है कि यह पैसा हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में जाएगा, न कि अंग्रेजी मीडिया में। इसका एक बड़ा कारण मीडिया चैनलों की संख्या अधिक होना और विज्ञापनों की आसमान छू रही कीमतें भी हैं।

डाटा हुआ सस्ता

यह सब संभव हुआ है क्योंकि डेटा पर होने वाला खर्च दिन- ब- दिन कम होता जा रहा है, जिसके चलते हम बड़ी संख्या में विडियो के माध्यम से हास्य, व्यंग्य और गंभीर चर्चाएं इस चुनावी मौसम में देखेंगे. गूगल के चलते अब हमारे कई रेलवे स्टेशनों पर निशुल्क वाईफाई है। मोबाइल इंटरनेट का उपयोग करने वाली लगभग आधी भारतीय आबादी पर, राजनीतिक दल डिजिटल पर खर्च करने के लिए बाध्य हैं। यदि किसी ने 2014 में एक रुपया खर्च किया है, तो 2019 में 10X तक खर्च होने पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

ज़माना तकनीक का

पिछले आम चुनावों में पीएम पद के लिए प्रचार करते हुए नरेंद्र मोदी द्वारा 3 डी होलोग्राफिक प्रक्षेपण का इस्तेमाल किया गया था। 2019 में ऑगमेंटेड रियलिटी का अधिक उपयोग देखा जाएगा क्योंकि तकनीक तब से ही बढ़ी है। आज, सेलेब्रिटी प्रचारकों का बहुत ही थोड़े समय में 100 रैलियाँ करना आसान नहीं है, लेकिन तकनीकी प्रगति के कारण उनमें से अधिकांश कर सकते हैं।

क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की बढ़ती आक्रामकता

जेडीएस एक क्षेत्रीय पार्टी है और कर्नाटक में शीर्ष पर है, पार्टी अपने प्रत्येक उम्मीदवार के लिए दृश्यता यानि विसिबिलिटी चाहती है। कर्नाटक के कई हिस्सों में आउटडोर मीडिया जैसे होर्डिंग्स आदि पर प्रतिबंध है। इसलिए भी टेलीविजन पर बहुत अधिक निर्भरता है। इसका मतलब प्रिंट मीडिया पर भरोसा कम होना नहीं है. आज के डिजिटल युग में, पार्टी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देने के बारे में भी विचार कर रही है। मीडिया के अनुसार, 2014 की तुलना में चाहे वह टीवी हो या प्रिंट या ऑनलाइन, निश्चित रूप से विज्ञापन खर्च काफी बढ़ जाएगा क्योंकि राजनीतिक दलों ने अभियान मोड में प्रवेश किया है और चुनाव से पहले मतदाताओं तक पहुंचने की हर कोई कोशिश कर रहा है। अनुमान है कि इस वृद्धि का एक बहुत बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय दलों का होगा।

virendra Gupta

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