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आर्युवेदिक औषधी में है हर बीमारी का इलाज:डॉ प्रयाग डाभी

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आर्युवेदिक औषधी में है हर बीमारी का इलाज:डॉ प्रयाग डाभी Ghamansan Editor

आज भारत मे कुल हजारो की संख्या मे ये दवाइयां बन रही है।

दोस्तो आप सभी को डॉक्टर प्रयाग डाभी का नमस्कार, आज हम बात कर रहे है कि कैसे सरकार एवं ड्रग्स माफीया की मिली भगत से आपको आैर आपको परिवार को नुकसान पहुंचा रही है।

नई दिल्ली।हमारी भारत सरकार को सबसे बडा टैक्स मेडीकल कंपनीयो से एवं एलोपैथीक हॉस्पिटल से प्राप्त होता है।क्योकी भारत मे ही नही पुरी दुनिया मे नंबर वन व्यापार एलोपैथी दवाइयो का है। एलोपैथीक दवाइयो की जरुरत केवल 350 दवाइयां है। लेकिन आज भारत मे कुल हजारो की संख्या मे ये दवाइयां बन रही है।

अगर आप बीमार हो गये और आप बड़े डॉक्टर के पास जाते है। वह डॉक्टर आपसे कन्सल्ट करके अपनी फीस 500 रूपए लेते है आैर आपको 1500 की दवाइया लिख देते है। अब आप सोचेंगे 3-4 दवाइयो के अलग अलग पत्ते दे दिए तो इतना पैसा कैसे ? आैर मेडीकल वाला आपको उसी रेट पर देगा जो एमआरपी लिखी होगी वह 1 -2 रुपये भी कम मे नही देगा वही दवाइयो से करीबन 90% मुनाफा छूपा होता है जो उपर से नीचे तक बांटा जाता है आैर चोंकाने वाली बात यह है की डॉक्टरो को 40 से 50 प्रतिशत दवाइयो मे कमीशन दिया जाता है।

आपने जो दवाइयां 1500 मे मेडीकल से खरीदी वह दवाइयां सिर्फ 150-200 रुपयो मे कंपनीयो मे तैयार होती है लेकिन इसकी एमआरपी ज्यादा होने के कारण टैक्स की कमाई सरकार को ज्यादा होगी। इसलिए सरकार को भी यही सिस्टम रास आती है।

वही दुसरी तरफ आयुर्वेद के प्रति सरकार निरस्त है क्योकी वह जानते है की उनकी सबसे बडी इनकम जो केवल आयुर्वेदिक दवाइयो से ही मिलेगी। वही दुसरी तरफ यदि आप कोई सरकारी कर्मचारी है आैर आप बिमार हो गए है,साथ ही  आप आयुर्वेदिक दवाइयो से इलाज कराना चाहते है तो आपको सरकारी 1% बिल पास नही होगा। क्योंकि सरकार आयुर्वेदिक बिल को मान्यता नही देती है।  

इसी वजह से लोगो मे आयुर्वेद नही पहुँच पाया। वही अगर आप एलोपैथिक दवाइयां चलाते है तो गवर्मेन्ट कर्मचारी होने के नाते आपका 75% तक बिल सरकार चूकाती है।

अगर आप शारीरिक रुप से बीमार है आैर अपंगता का सर्टिफिकेट बनवाने आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाते है तो वह भी सरकार मान्य नही करेगी। क्योंकि डॉक्टर जो केवल एमबीबीएस की पढाई करता है तो आधुनिक एलोपैथी से जुडा नही होता है।

अगर सरकार सिर्फ आयुर्वेद अपनाने की ही बात कर रही है तो यह बात गलत है क्योकी जो सुविधा एवं लाभ एलोपैथी डॉक्टरो को मिलता है वही लाभ आयुष चिकित्सक को भी मिलना चाहिये तभी तो आयुर्वेद का विकास होगा अन्यथा आगे जाकर आयुर्वेदिक कॉलेजों मे एडमीशन भी नही होगा।  हमारा 500 साल पुराना आैर सबसे पहले स्थापित होने वाली चिकित्सा पैथी आयुर्वेद का अंत हो जायेगा।

लेखक:डॉ.प्रयाग डाभी
मोबाइल 999991653




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