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जानें यहाँ सिर्फ कंडों से होता है अंतिम संस्कार

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जानें यहाँ सिर्फ कंडों से होता है अंतिम संस्कार Ghamansan Editor

परंपरा के पीछे ये है मान्यता

रायपुर: दुर्ग, बेमेतरा व बालोद में 365 कंडों से चिता सजाने की परंपरा है, जिसे  हर घर से दिया जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कंडा पवित्र है, इससे चिता जलाने पर वातावरण शुद्धि होती है।

गांव में किसी की मौत पर हर घर से कंडे लाकर नियत स्थल पर रख दिए जाते हैं।फिर उन कंडों व कुछ लकड़ियों को बैलगाड़ी से श्मशान पहुंचाया जाता है। 6 फीट लंबी, 3 फीट चौड़ी व 6 इंच गहरी जगह तैयार कर 365 साबुत कंडों से चिता सजाने का काम शुरू होता है।

आपको बता दें कि औसतन एक चिता में 5 क्विंटल तक लकड़ी लगती है, जिसकी कीमत लगभग 3 हजार रुपए है। परिवहन खर्च अलग। कमर व छाती वाले हिस्से के दहन में एक क्विंटल तक लकड़ी लगती है। कंडे से अंत्येष्टि में 4 क्विंटल तक लकड़ी कम लगती है।

परंपरा के पीछे ये है मान्यता
365 कंडों को साल के 365 दिन व चक्के को कालचक्र का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए इनका उपयोग अनिवार्य है। पूजनीय वनस्पतियों नीम, पीपल व वट के बजाय आम या बबूल की लकड़ियों का उपयोग होता है।