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उत्तराखंड: 16 साल में 7 मुख्यमंत्री, अबकी बार होगी टिकाऊ सरकार

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उत्तराखंड: 16 साल में 7 मुख्यमंत्री, अबकी बार होगी टिकाऊ सरकार Ghamansan Editor

इन सबमें एक मुख्य वजह है राजनीतिक अस्थिरता

नई दिल्ली। कई सालों की लंबी लड़ाई के बाद करीब 16 साल पहले यूपी से अलग होकर उत्तराखंड देश का 27वां राज्य बना था। उत्तराखंड गठन के पीछे मुख्य मकसद था राज्य का विकास। लेकिन, देश के नक्शे पर अस्तित्व में आने के बाद उत्तराखंड विकास के पैमाने पर खरा नहीं उतर सका। उत्तराखंड में विकास ना होने की कई वजह हो सकती हैं। लेकिन, इन सबमें एक मुख्य वजह है राजनीतिक अस्थिरता।

उत्तराखंड ने सिर्फ 16 सालों में 7 मुख्यमंत्री देखे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल को छोड़कर कोई भी मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। लेकिन एनडी तिवारी के कार्यकाल से पहले और बाद में बनने वाले सीएम उत्तराखंड के लिए आयाराम-गयाराम ही बने रहे।

नित्यानंद स्वामी उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री थे। राज्य का गठन होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने यूपी विधान परिषद के तत्कालीन सदस्य नित्यानंद स्वामी को नए राज्य के मुख्यमन्त्री का पदभार संभालने के लिए कहा। हालांकि स्वामी ज्यादा दिनों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं बचा पाए। पार्टी के कहने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। स्वामी का कार्यकाल 9 नवम्बर 2000 से 29 अक्टूबर 2001 तक चला।

भाजपा ने नित्यानंद स्वामी से इस्तीफा लेने के बाद राज्य में कैबिनेट मंत्री भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया। साल 2002 में राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव कराए गए। चुनाव में भाजपा की हार के चलते कोश्यारी को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। कोश्यारी 30 अक्टूबर 2001 से 1 मार्च 2002 तक राज्य की सीएम रहे।

साल 2002 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बंपर जीत मिली। कांग्रेस के कद्दावर नेता और उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके एनडी तिवारी राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री बने। एनडी तिवारी राज्य के पहले और आखिरी नेता है जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। हालांकि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के कारण उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। वो 24 मार्च 2002 से 7 मार्च 2007 तक मुख्यमंत्री रहे।