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    •   दक्षिणी दिल्ली के टैगोर गार्डन से बीजेपी प्रत्याशी आगे।
    •   पूर्वी दिल्ली की 63 सीटों में से 41 पर बीजेपी आगे चल रही है।
    •   उत्तरी दिल्ली: 104 सीटों में 70 पर बीजेपी आगे चल रही है।
    •   पूर्वी दिल्ली की झिलमिल सीट से आम आदमी पार्टी की निशा शर्मा आगे।
    •   एमसीडी की 270 सीटों के रुझान सामने आए, तीनों निगमों में बीजेपी को बहुमत।
    •   पूर्वी दिल्ली की सभी सीटों के रुझान सामने आए, बीजेपी को बहुमत। कांग्रेस-आप 12-12 सीटों पर आगे।
    •   2012 के निगम चुनाव में बीजेपी को मिली थी 142 सीटें।
    •   पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद से बीजेपी प्रत्याशी सबरा मलिका आगे।
    •   दिल्ली: जामा मस्जिद इलाके में बीजेपी प्रत्याशी आशा आगे चल रही हैं।
    •   दिल्ली: तीनों निगमों की 150 सीटों पर बीजेपी को मिली बढ़त।
    •   MCD: 270 में से 197 सीटों के रुझान: 134 पर बीजेपी, 40 पर कांग्रेस.
    •   दिल्ली: शुरुआती रुझानों में बीजेपी नंबर एक, कांग्रेस 2 और AAP तीसरे नंबर की पार्टी।

महंगा पड़ सकता है बच्चों को जबरन खिलाना

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महंगा पड़ सकता है बच्चों को जबरन खिलाना Ghamansan Editor

यह जानने के लिए हमने उनकी शारीरिक गतिविधियों,टेलीविजन टाइम तथा भूख पर ध्यान केंद्रित किया।

न्यूयॉर्क:  अपने बच्चों को ठूंस-ठूंस कर खिलाने वाले माता-पिता सावधान हो जाएं, क्योंकि एक शोध में यह बात सामने आई है कि ऐसा करने से बच्चे का वजन बेवजह बढ़ जाता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिप्रद है। खाने के सामान्य व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए यह जरूरी है कि बच्चे खुद तय करें कि वह कितना खाना चाहते हैं।
अध्ययन के मुताबिक, यदि बच्चों को प्लेट में बचा एक-एक दाना खाने पर जोर दिया जाता है, तो वे अपने शरीर के संकेतों को समझना बंद कर देते हैं और तब तक खाते हैं, जब तक उनके माता-पिता खुश न हो जाएं। नार्वे युनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में सहायक प्रोफेसर सिल्जे स्टेनस्बेक ने कहा, कुछ बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अन्य की तुलना में क्यों बढ़ता है, यह जानने के लिए हमने उनकी शारीरिक गतिविधियों,टेलीविजन टाइम तथा भूख पर ध्यान केंद्रित किया।

स्टेंसबेक ने कहा, हमारे अध्ययन में यह बात सामने आई कि उन बच्चों के बीएमआई में ज्यादा वृद्धि होती है, जिनमें भोजन उनके खाने के स्वभाव को प्रभावित करता है। वे कितना खाते हैं यह भूख के हिसाब से तय नहीं होता, बल्कि खाने को देखकर तथा उसके गंध से तय होता है। यह शोध दीर्घकालीन अध्ययन का हिस्सा है, जो कई वर्षो तक बच्चों के मनोवैज्ञानिक तथा मनो-सामाजिक विकास पर अध्ययन करता है। यह अध्ययन पत्रिका 'पीडियाट्रिक सायकोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है।

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