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भाजपा को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले आडवाणी का ऐसा है सियासी सफरनामा | Political Career of Lal Krishan Advani

Posted on: 22 Mar 2019 11:47 by Surbhi Bhawsar
भाजपा को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले आडवाणी का ऐसा है सियासी सफरनामा | Political Career of Lal Krishan Advani

भारतीय जनता पार्टी ने गुरूवार को लोकसभा चुनाव के लिए अपने 182 उम्मीदवारों की पहली सूची जरी कर दी है। इस सूची में भाजपा ने पार्टी को दो सांसदों से बुलंदियों पर पहुंचाने वाले लालकृष्ण आडवाणी का टिकट काट दिया है। लालकृष्ण आडवाणी की गांधीनगर सीट से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को टिकट दिया गया है। आडवाणी भले ही आज चुनावी राजनीति से परे हटे हैं लेकिन भाजपा के मुख्य विपक्षी पार्टी बनने और सत्ता पर काबिज होने का श्रेय सिर्फ उन्ही को जाता है। आज हम आपको आडवाणी का राजनीतिक सफरनामा बताने जा रहे है।

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कराची में हुआ जन्म

8 नवंबर 1927 को कराची (पाकिस्तान) में जन्मे आडवाणी आज 91 साल की उम्र में भी राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के सहायक के तौर पर जनसंघ में राजनीति का कामकाज देखना शुरू किया था। अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी ने भाजपा का गठन किया। 1977 में स्वतंत्र भारत में पहली बार भाजपा की सरकार बनी और इसमें आडवाणी सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने थे।

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ऐसा है राजनीतिक सफ़र

लालकृष्ण आडवाणी का टिकट क्त जाने के बाद आज वह एक बार फिर चर्चा में है। इस बार उन्हें उनकी परंपरागत सीट से टिकट नहीं मिला है और इस सीट से पार्टी ने अमित शाह को चुनाव मैदान में उतारा है। इस सीट से आडवाणी छह बार जीतकर संसद पहुंचे है और उनकी राजनीतिक यात्रा में गांधीनगर का बड़ा योगदान रहा है।

राजनीति के लौहपुरुष कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी 1970 से लेकर 1989 तक लगातार राज्यसभा से ही चुने जाते रहे हैं। 1983 में हुए लोकसभा चुनाव में पहली बार वह नई दिल्ली से लड़े और जीत गए। इसके बाद 1991 में 10वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में वह गुजरात के गांधीनगर से चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। हालांकि जैन हवाला कांड में नाम आने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

1996 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया और ऐलान किया कि जब तक हवाला कांड से उनका नाम नहीं हट जाता तब तक वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस मामले में क्लीन चिट मिलने के बाद 1998 के लोकसभा चुनाव में वह एक बार फिर गांधीनगर से जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 1999, 2004, 2009, और 2014 में भी लोकसभा चुनाव जीता। इस समय वह सातवीं बार लोकसभा सांसद के रूप में सक्रिय हैं।

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