नई दिल्ली:’’पीएफएस के क्रैडिट पोर्टफोलियो में 30 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ, किंतु दबाव झेल रही सम्पत्तियों की वजह से मुनाफे पर असर पड़ा।’’वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही के प्रदर्शन पर कंपनी के प्रबंध निदेशक व सीईओ डाॅ. अशोक हल्दिया ने कहाः’’कंपनी का क्रैडिट पोर्टफोलियो निरंतर बढ़ रहा है, हालांकि लाभकारिता पर पहले से दबाव में चली आ रही सम्पत्तियों के कारण असर पड़ा है।

31 दिसंबर 2017 को बकाया कर्ज़ यानी फंड आधारित एवं गैर-फंड आधारित का समुच्चय – मंजूर ऋण के बरक्स रु. 13,297 करोड़ था; यानी की साल दर साल आधार पर करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान ऋण एवं इक्विटी निवेश के बरक्स प्रावधानों से वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ा है और प्रदर्शन न करने वाली एवं दबाव झेल रही अधिकांश सम्पत्तियां समाधान की ओर बढ़ रही हैं।

दबाव युक्त ऋण सम्पत्तियों पर नियंत्रण हेतु निरंतर कोशिशों से 31 दिसंबर 2017 तक सकल अनर्जक परिसंपत्तियां (एनपीए) घट कर 4.87 प्रतिशत हो गईं, जबकि 30 सितंबर 2017 तक यह आंकड़ा 5.92 प्रतिशत था। 23 प्रतिशत पूंजी पर्याप्तता अनुपात के साथ कंपनी के पास पर्याप्त पूंजी है जिसके बल पर कंपनी दबाव युक्त पोर्टफोलियो को संभालते हुए वृद्धि को बरकरार रखेगी।’’

वित्तीय परिणामों की खास झलकियां वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में सकल राजस्व रु. 302 करोड़ रहा, जबकि वि.व.2017 की तीसरी तिमाही में यह रु. 314 करोड़ था। समीक्षाधीन तिमाही में ब्याज से हुई आय रु. 283 करोड़ थी जबकि बीते वि.व. की समान अवधि में यह आंकड़ा रु. 293 करोड़ था। साल दर साल आधार पर अनर्जक परिसम्पत्तियों तथा अन्य दबाव युक्त सम्पत्तियों की वजह से ब्याज से हई आमदनी 4 प्रतिशत घटी है।

 वि.व.2018 की तीसरी तिमाही में फीस आधारित आय 18 करोड़ रुपए रही।31 दिसंबर 2017 को समाप्त तिमाही में कर पूर्व लाभ 53 करोड़ रुपए और कर पश्चात् लाभ 34 करोड़ रुपए रहा।इस तिमाही में शुद्ध ब्याज मार्जिन (छप्ड) और स्प्रैड क्रमशः 4.24 प्रतिशत और 2.26 प्रतिशत रहे। इस दौरान ऋण परिसम्पत्तियों पर यील्ड 10.50 प्रतिशत रहा जबकि उधार लिए गए फंड की लागत 8.23 प्रतिशत रही। दबाव युक्त ऋण परिसम्पत्तियों के प्रभाव को व्यवस्थित करने के बाद इस तिमाही में छप्ड व स्प्रैड क्रमशः 5.27 प्रतिशत एवं 3.31 प्रतिशत रहे जबकि वि.व. 2017 की तीसरी तिमाही में ये दोनों क्रमशः 5.44 प्रतिशत व 3.50 प्रतिशत थे।

वि.व. 2018 की नौमाही बनाम वि.व. 2017 की नौमाही  वि.व.2018 की नौमाही में कुल राजस्व 900 करोड़ रुपए रहा जबकि वि.व.2017 की नौमाही का कुल राजस्व 920 करोड़ रुपए था। इसी प्रकार समीक्षाधीन नौमाही में ब्याज से हुई आय 840 करोड़ रुपए रही जो कि बीते वि.व. की नौमाही में 850 करोड़ रुपए थी।समीक्षाधीन नौमाही में फीस आधारित आय 55 करोड़ रुपए रही जबकि बीते वि.व. की नौमाही में यह 50 करोड़ रुपए थी।

31 दिसंबर 2017 को समाप्त नौमाही में कर पूर्व लाभ 232 करोड़ रुपए और कर पश्चात् लाभ 135 करोड़ रुपए रहा।वि.व.2018 की नौमाही में शुद्ध ब्याज मार्जिन (छप्ड) और स्प्रैड क्रमशः 4.39 प्रतिशत और 2.39 प्रतिशत रहे। इस दौरान ऋण परिसम्पत्तियों पर यील्ड 10.59 प्रतिशत रहा जबकि उधार लिए गए फंड की लागत 8.21 प्रतिशत रही। दबाव युक्त ऋण परिसम्पत्तियों के प्रभाव को व्यवस्थित करने के बाद इस नौमाही में छप्ड व स्प्रैड क्रमशः 5.02 प्रतिशत एवं 3.02 प्रतिशत रहे जबकि वि.व. 2017 की नौमाही में ये दोनों क्रमशः 5.43 प्रतिशत व 3.53 प्रतिशत थे।

31 दिसंबर 2017 तक कुल बकाया कर्ज यानी ऋण परिसम्पत्तियों एवं मंजूर कर्ज के बरक्स गैर-फंड आधारित वादे का समुच्चय 30 प्रतिशत बढ़ कर रु. 13,297 करोड़ हो गया जो कि 31 दिसंबर 2016 को रु. 10,190 करोड़ था। ऋण परिसम्पत्तियों का समुच्चय रु. 11,672 करोड़ तथा आगामी तिमाहियों में वितरित होने वाले गैर-फंड आधारित वादे रु. 1,625 करोड़ पर रहे।

31 दिसंबर 2017 तक सकल अनर्जक परिसम्पत्तियां (एनपीए) रु. 569 करोड़ रहीं जबकि 30 सितंबर 2017 तक यह आंकड़ा रु. 623 करोड़ था। साल दर साल के हिसाब से 31 दिसंबर 2016 को सकल एनपीए रु. 460 करोड़ थीं। मंजूर किया गया कुल संचयी प्रभावी ऋण रु. 22,187 करोड़ था। तिमाही में मंजूर कर्ज रु. 1,685 करोड़ था जिसमें मुख्यतः रु. 596 करोड़ नवीकरणीय परियोजनाओं के लिए, रु. 339 करोड़ ट्रांस्मिशन और रु. 600 करोड़ वितरण केन्द्र के लिए थे।31 दिसंबर 2017 को समाप्त तिमाही के दौरान कुल ऋण संवितरण रु. 1,501 करोड़ तथा नौमाही में रु. 3,243 करोड़ था।

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