मुंबई: प्रोबायोटिक श्रेणी में अपनी जगह बनाने के बादए याकुल्ट डैनोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने एक और उत्पाद याकुल्ट लाइट का संकलन कर भारत में अपने उत्पाकद पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। गौरतलब है कि याकुल्ट डैनोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड याकुल्ट होंशा और डैनोन का 50:50 का संयुक्त उपक्रम है।

इस नए उत्पाद का अनावरण फिटनेस आइकन और बॉलीवुड अदाकारा शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने कियाए इस मौके पर याकुल्ट डैनोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री मिनोरु शिमादा और याकुल्ट डैनोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की जनरल मैनेजर-साइंस ऐंड रेगुलेटरी अफेयर्स डॉण् नीरजा हजेला मौजूद थीं।याकुल्ट लाइट सेहत की रोजमर्रा जरूरतें पूरी करता है। यह सभी आयु-वर्गों के लिए उचित उत्पाटद है।

इसमें चीनी और कैलोरी की मात्रा कम होती है। इसमें कुदरती स्वीटनर स्टेवियोल ग्लाइकोसाइड का इस्तेमाल किया गया है। पांच बोतलों के पैक के लिए याकुल्ट लाइट का अनुशंसित खुदरा मूल्य 80 रुपये है।याकुल्ट इंडिया के लॉन्च पर याकुल्ट डैनोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री मिनोरु शिमादा ने कहा दुनिया भर में प्रोबायोटिक कैटेगरी में हम सबसे आगे हैं। हमारे प्रतिष्ठित प्रोबायोटिक पेय याकुल्ट की 35 मिलियन बोतल हर रोज दुनिया भर के कई क्षेत्रों और 38 देशों में खपत होती है।

हमारे प्रोबायोटिक स्ट्रेन एलसीएस से आंत के स्वास्थ्य को सुधारने का हमारा मूल दर्शन है। इसी से संचालित भारत में हमारी यात्रा अब तक रोमांचक रही है। हम अपने उत्पादों के लिए बाजार में आगे भी विकास की संभावनाएं देखते हैं। हमारा सिग्नेचर ब्रांड याकुल्ट अब घरेलू नाम बन चुका है और ज्यादातर परिवारों में इसका सेवन रोज किया जाता है। आज हम देश भर के 12 राज्यों के 40 से ज्यादा शहरों में हैं।

याकुल्ट डैनोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की जेनरल मैनेजर-साइंस ऐंड रेगुलेटरी अफेयर्स डॉ. नीरजा हजेला ने कहा कि स्वास्थ्य मापदंडों पर भारत बदलाव के मुहाने पर है जो ये बताते हैं कि हर दस भारतीयों में से सात जीवनशैली संबंधी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं। हालांकि जहां यह खराब पोषण तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी से जुड़ा है वहीं खराब आंत की स्थिति एक महत्वपूर्ण निर्धारक कारक भी है।

उन्होंने इस पर जोर दिया कि भोजन के पाचन में इसकी भूमिका के अलावा आंत में शरीर की करीब 70 प्रतिशत प्रतिरोधी कोशिकाएं होती हैं और यही कारण है कि यह सबसे बड़ा प्रतिरोधी अंग है। इसलिए यह बीमारी के खतरे को निर्धारित करने और संक्रमण का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।