नई दिल्ली: आज पूरी दुनिया में कपल्स वैलेंटाइन डे मना रहे है। वही कई लोग इस दिन को वैलेंटाइन डे के रूप में नहीं, बल्कि भगत सिंह की याद में मनाते है। इसे लेकर कई मैसेज भी वायरल होते है।

कुछ लोग कहते है कि महान क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लाहौर के एक जेल में 1 फरवरी 1931 को फांसी दे दी गई थी। वही कई लोगो का कहना है कि आज के दिन यानि 14 फरवरी 1931 को इन्हें फांसी की सजा सुनाई थी।

लेकिन हम आपको बता दे कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे सभी मैसेज गलत है। आज के दिन इन क्रान्तिकारियो को फांसी की सजा नहीं सुने गई थी। आज हम आपको बताते है कि भगत सिंह का 14 फरवरी से रिश्ता क्या है?

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 14 फरवरी को नहीं बल्कि 23 मार्च को फांसी पर लटकाया था। 23 मार्च को पूरा देश शहीदी दिवस के रूप में भी मनाया है।

7 अक्टूबर 1930 को ब्रिटिश कोर्ट ने अपने 300 पेज का जजमेंट सुनाया। जिसमें भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को सांडर्स मर्डर और एसेंबली बम कांड में दोषी करार दिया गया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई।

इतिहास के जानकारों का कहना है कि 14 फरवरी 1931 को मदन मोहन मालवीय जी ने फांसी से ठीक 41 दिन पहले एक मर्सी पिटीशन ब्रिटिश भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन के दफ्तर में डाली थी, जिसको इरविन ने खारिज कर दिया था। हालांकि कई रिपोर्ट्स का कहना है कि इतिहास में ऐसे भी किसी दावे की पुष्टि नहीं होती।