इंदौर की ‘भाभी’ का नाम पूरे देश में….

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इंदौर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छ शहर में मध्यप्रदेश का इंदौर टॉप पर आया है। इसी को लेकर शहर की मेयर मालिनी गौड़ का नाम पूरे देश में रोशन हो गया है। उन्हें ‘भाभी’ के नाम से भी जाना जाता है।

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बता दें कि स्वच्छ भारत अभियान 2014 में लॉन्च किया गया। महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष यानी 2019 तक भारत को साफ बनाना और खुले में शौच से मुक्त करना इस अभियान का मकसद है।

ऐसे बनी इंदौर को नंबर-1 बनाने की रणनीति:-
इंदौर नगर निगम के कमिश्नर मनीष सिंह के मुताबिक, सबसे पहले शहर के हर हिस्से को साफ-स्वच्छ बनाने की योजना के लिए तात्कालिन स्थिति का विश्लेषण किया गया। दिन-रात चलने वाले अभियान के लिए अधिकारियों से लेकर सफाइकर्मियों और कचरा वाहनों के चालकों की टीम बनाई गई। दिन-रात काम शुरू हुआ। फिर उन इलाकों की पहचान की गई जहां ज्यादा गंदगी थी।

कचरे के निस्तारण के लिए नई व्यवस्था की जरूरत साफ दिखाई दी। पुरानी सफाई एजेंसी को बदला गया, इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया गया और नगर निगम की वर्कशॉफ को नया जीवन दिया गया क्योंकि इसके बगैर इतने बड़े शहर की गंदगी को उठाना संभव नहीं। शहर में एक बहुत बड़े जन-जागरण अभियान की शुरुआत की गई जिसमें राजनैतिक नेतृत्व के साथ ही गणमान्य नागरिक शामिल हुए। कोशिशें तेज हुईं और अंततः कामयाबी मिली।

नगर निगम, सफाईकर्मी और जनता आए साथ तो इंदौर बना नंबर-1:-
इंदौर में नगर निगम ने सैकड़ों कर्मचारियों और आधुनिक मशीनों से सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाया। इतना ही नहीं, इंदौर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर भी काफी ज्यादा काम हुआ है। इंदौर शहर और जिला दोनों ही खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं। शहरी व ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है।

– शहर में घर-घर से कचरा उठाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया। जिसके तहत डोर-टू-डोर नगर निगम का वाहन पहुंचता है।

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– घर से कचरा उठाने के वक्त ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर लिया जाता है.
– रहवासी इलाके में दिन में एक बार जबकि व्यावसायिक इलाकों में दो बार कचरा कलेक्ट किया जाता है।
– शहर को खुले डस्टबिन से मुक्ति दिलाने के लिए डस्टबिन फ्री अभियान चलाया गया।

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-जगह-जगह पब्लिक टॉयलेट्स बनाए गये।
– इस अभियान के तहत सुंदर और पूरी तरह से बंद दो डस्टबिन लगाए गए, जिसमें सूखा और गीला कचरा  अलग-अलग इकठ्ठा होता है।

– शहर में पांच जगहों पर  ट्रांसपोर्टेशन हब बनाए गए, यहां से सारा कचरा ट्रेंचिंग ग्राउण्ड पहुंचता है।

Related image– सूखा और गीला कचरा अलग-अलग होने की वजह से तुरंत प्रोसेसिंग के लिए चला जाता है।
– यहां कचरे से खाद बनाने के अलावा प्लास्टिक सामग्री को प्रोसेस कर सड़क बनाने में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

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इन बिंदुओं पर हुआ सर्वे:-
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, गली-मोहल्लों सफाई, सार्वजनिक शौचायलों में सफाई, अस्पतालों में सफाई, शहर के अंदर सफाई के लिए जागरुकता अभियान, ओडीएफ, कचरा निष्पादन, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, स्वच्छ पेयजल।