चीन की विस्तारवादी नीति को झटका, नेपाल ने रद्द किया करार

China's expansionist policy shock, Nepal canceled the agreement

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नई दिल्ली :   नेपाल ने चीन की विस्तार वादी निति को झटका देते हुए, बहु प्रतीक्षित बूढ़ी गंडकी जल विद्युत परियोजना के लिए चीन के साथ हुए करार को खत्म कर दिया है।  नेपाल में पांव पसारने में जुटी चीन सरकार के मंसूबे पर पानी फिर गया है।

जबकि नेपाल सरकार ने पारदर्शिता और कानूनी खामियों का हवाला दिया है, जबकि सिंहदरबार में आयोजित मंत्री परिषद की बैठक में संसदीय समिति के निर्देशन के अनुसार 1,200 मैगावाट की राष्ट्रीय गौरव परियोजना का अनुबंध खत्म करने का निर्णय लिया गया। यह करार चीन के गेजुबा ग्रुप के साथ किया गया था।

हालंकि यह समझौता इसलिए विवादों में घिर गया क्योंकि खरीद नियमों के अनुसार प्रतियोगी बोली के सामान्य सिद्धांत का उल्लंघन करते हुए एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किए गए थे। जबकि फ्रांस की कंपनी ट्रैक्टबेल इंजीनियरिंग के एक अध्ययन के मुताबिक 1,200 मैगावाट परियोजना के विकास में लगभग 260 बिलियन डॉलर की लागत आने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल अपने संसाधनों के इस्तेमाल और समुचित योजना के जरिए स्वयं इस परियोजना का निर्माण कर सकता है।