अहोई अष्टमी की जानिये पूजन विधि

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नई दिल्ली अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने पुत्रों की भलाई के लिए यहाँ व्रत करती है व्रत की विधि इस प्रकार है इस व्रत में सुबह से लेकर शाम तक उपवास करती हैं. शाम को  आकाश में तारों को देखने के बाद व्रत तोड़ा जाता है.

अहोई अष्टमी  करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद होती है करवा चौथ के समान अहोई अष्टमी भी उत्तर भारत में ज्यादा प्रसिद्ध है. अहोई अष्टमी को अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह व्रत अष्टमी तिथि, के आठवां दिन होता है,

आइये जानते है करने का तरीका
यहाँ व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पुत्रवती स्त्रियां बिना जल और अन्न ग्रहण व्रत रखती है  शाम के समय दीवार पर आठ कोनों वाली एक पुतली बनाती हैं. पुतली के पास ही स्याउ माता व उसके बच्चे बनाए जाते हैं. इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्ध्य देकर कच्चा भोजन खाया जाता है

ऐसे की जाती है पूजा
पूजा स्थान पर अहोई माता का चित्र रखें या फिर दीवार पर उनकी आकृति बनाकर उसकी पूजा करें. पूजा स्थान को साफ कर वहां कलश की स्थापना करें. व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सुबह उठकर स्नान करें पूजा का संकल्प करें कि पुत्र की लम्बी आयु और  सुखमय जीवन की अहोई माता से आरधना करे

इस स्याहु की पूजा रोली, अक्षत, दूध व भात से की जाती है. पूजा चाहे आप जिस विधि से करें लेकिन पूजा के लिए एक कलश में जल भर कर रख लें. पूजा के पश्चात सासु मां के पैर छूएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. पूजन के बाद अहोई माता को दूध और चावल का भोग लगाया जाता है. पूजा के बाद अहोई माता की कथा सुनें और सुनाएं.

यह है शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त- शाम 5 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 06 मिनट तक.
पूजा की अवधि- 1 घंटा 15 मिनट
तारों को देखने का समय- 6 बजकर 18 मिनट
अहोई अष्टमी के दिन चंद्रोदय-11 बजकर 53 मिनट पर