चालीस करोड़ के घोटाले में फंसे आबकारी अफसर

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इंदौर: शराब ठेके से सरकार को होने वाली आमदनी में इंदौर में पदस्थ आबकारी अफसरों की मिलीभगत से लगभग 40 करोड़ रुपए की चपत लगी है। इस मामले में आबकारी विभाग के इंदौर के असिस्टेंट कमिश्नर संजीव दुबे और उनके स्टाफ की भूमिका सवालों के घेरे में है और विभाग ने इनके विरुद्ध जांच कराते हुए पुलिस को मामला सौंप दिया है। पुलिस ने इस मामले में 12 शराब ठेकेदारों समेत 14 लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है।

इतना ही नही आबकारी के उपायुक्त विनोद रघुवंशी की भूमिका  से भी इंकार नही किया जा सकता ? आपको बता दे की लूप लाइन में पदस्थ एक उपायुक्त के अनुसार यदि उनके कार्यकाल में यह घोटाला उजागर होता तो वे अब तक निलंबित किये जा चुके होते!
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आबकारी सूत्रों के अनुसार घोटाले की शुरुआत सहायक आबकारी आयुक्त संजय तिवारी के जाने के बाद दिसंबर  15 से ही शुरू हो चुकी थी एक बार फर्जीवाड़ा करने के बाद ठेकेदारों के हौसले बुलंद होते गये उधर दुकानों के नवीनीकरण के बाद संजीव दुबे आबकारी के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव के लाड़ले बनते गये! ए डी ओ से लगाकर अन्य तबादले संजीव दुबे की पसंद के होने लगे घोटाले में फॅसे सुख नंदन पाठक उपनिरीक्षक से ए डी ओ बने  जो बरसों से इंदौर में जमे थे नियमानुसार प्रमोशन के बाद नयी पोस्टिंग होनी थी किन्तु संजीव दुबे ने अपने प्रभाव के चलते इंदोर ही  रोके रखा ताकि घोटाले को अंजाम दिया जा सके !

आबकारी सूत्रों के अनुसार घोटाले की रकम यदि ठेकेदारों  द्वारा जमा कर दी जाएगी तो सबको क्लीन चिट मिल जायेगी  ?इसलिए पूरा विभाग दबाव बनाकर रकम जमा करने के प्रयास करने में लग गया कानून विदों के अनुसार पैसा जमा करने के बाद भी अपराध खत्म नही हो सकता क्योकि जिम्मेदार ने अपने कर्तव्यों का पालन नही किया और लापरवाही बरती, बहरहाल फर्जी चालान कांड को दबाने के लिए राजनीतिक हथकंडे अपनाना शुरू हो गये सूत्रों के अनुसार  गिरीश सिकरवार  ए डी ओ नरेन्द्रसिंह तोमर से जुड़े है ,सुखनंदन पाठक का भाई पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह  की सुरक्षा में वर्षो से है और संजीव दूबे के व्यापम घोटाले के आरोपी सुधीर शर्मा,मुख्यमंत्री के करीबी दिलीप सूर्यवंशी सहित कई  मंत्रियों से नजदीकी है….  ?

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