1500 जादुई खंभों पर टिका ये मंदिर, ऐसे होते हैं दर्शन..

0
945

राजस्थान : दुनिया में अद्भुत मंदिरों, गुफाओं और अनूठी विरासतों का देश है ‘भारत’। तो आइए आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं, जो संगमरमर से बना हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि यह मंदिर अपनी स्थाहपत्य  कला के साथ नक्काआशी और विशेष रूप से अपने तकरीबन 1444 खंभों पर टिके होने के कारण पूरी दुनिया में आश्चर्य है।Image result for ranakpur-jain-temple-rajasthan-wonder-of-indiaहम बात कर रहे हैं राजस्थारन के उदयपुर जिले से तकरीबन 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थिपत रणकपुर में स्थित जैन मंदिरों की। राजस्थान के रणकपुर में स्थित ये जैन मंदिर जैन धर्म के पांच प्रमुख तीर्थस्थीलों में से एक है। यह मंदिर बेहद ख़ूबसूरती से तराशे गए हैं। Image result for ranakpur-jain-temple-rajasthan-wonder-of-indiaइन मंदिरों की खासियत यह है कि ये तकरीबन 1444 खंभों पर टिका हुआ है और पूरी तरह से संगमरमर के बना है। इन मंदिरों की स्थायपत्यय कला का दुनिया में कोई सानी नहीं।  इन मंदिरों का निर्माण 15वीं शताब्दीह में राणा कुंभा के शासनकाल में हुआ था।  इन्हींक के नाम पर इस जगह का नाम रणकपुर पड़ा। Image result for ranakpur-jain-temple-rajasthan-wonder-of-indiaइस मंदिर में चार कलात्मक प्रवेश द्वार हैं।  मंदिर के मुख्य गृह में तीर्थंकर आदिनाथ की संगमरमर से बनी चार विशाल मूर्तियां हैं। मंदिर की सबसे महत्वापूर्ण विशेषता इसके सैकड़ों खम्भे हैं।  जानकारों के मुताबिक इन खंभों की संख्याा तकरीबन 1444 है जो पूरी की पूरी 1500 हो जाती है। Image result for ranakpur-jain-temple-rajasthan-wonder-of-indiaखास बात यह है कि इन सभी खंभों से जहां से भी आपकी दृष्टि जाती है, वहीं से मुख्यण मूर्ति के आपको दर्शन होंगे।  यह एक तरह से जादू की तरह से लगता है।  इन खंभों पर शानदार नक्काशी की गई है। मंदिर में 76 छोटे गुम्बदनुमा पवित्र स्थान, चार बड़े प्रार्थना कक्ष तथा चार बड़े पूजन स्थल हैं।  ये मनुष्य को जीवन-मृत्यु की 84 योनियों से मुक्ति प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। यदि आप पर्यटन के लिहाज से राजस्थागन घूमने आए हैं तो आपको रणकपुर के मंदिरों को जरूर देखना चाहिए।  दुनिया भर से लोग इसे देखने पहुंचते हैं।  ये अपने आप में आश्चोर्य हैं।
इन मंदिरों को देखकर आप अंदाजा भी नहीं लगा पाएंगे कि ऐसे विशाल मंदिर उस दौर में बनाएं गए हैं, जहां ना तो मशीनें थीं और ना ही इंजीनियरिंग के लिए दूसरे कौशल।