वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित जी की पोस्ट

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लीजिये फिर गांधी की आड़ ले ली! किसानों को गोलियों से छलनी करबाने बाले शिवराज सिंह चौहान अब खुले मैदान में बैठकर उपवास करेंगे और किसानों की समस्याएं सुनेंगे!  पहले गोली मरबाई अब  आत्मग्लानि दूर करने के लिये उपवास ! क्या शानदार स्क्रिप्ट है नाटक की ? सवाल यह है कि खुद को किसान पुत्र कहने बाले शिवराज सिंह क्या किसानों की समस्याएं नही जानते हैं ?क्या उन्हें नही मालूम कि मंडियों में क्या हो रहा है!या बे यह नही जानते कि उनकी सरकारी मशीनरी जमीन पर क्या कर रही है? जितनी घोषणाएं उन्होंने की हैं उन पर कितना अमल हुआ है ये तो खुद उनके चुनाव क्षेत्र रहे विदिशा और वर्तमान विधानसभा क्षेत्र बुधनी का सर्वे करने से ही साफ हो जाएगा!
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खेती की समस्या अपनी जगह है।लेकिन किसान के सामने अलग अलग तरह की समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं।
1.गांव के स्कूलों में शिक्षक नही हैं।
2.स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर तो छोड़िये कंपाउंडर भी नही हैं।
3.बिजली की आपूर्ति नियमित नही है।
4.कर्जमाफी और फसल बीमा की बात शिवराज लगातार कर रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत दावों से उलट है।
5.खुद के बेटों को अमेरिका में पढ़ाने बाले किसान शिवराज के अफसर किसानों के कपड़ों पर सबाल उठा रहे हैं।इसका सीधा अर्थ यह है कि उन्हें मालूम है कि प्रदेश भले ही कृषि कर्मण पुरस्कार जीत रहा हो पर प्रदेश के किसान की हैसियत इतनी नही है कि वह अपने बच्चों को 300 रुपये की जीन्स पहना सके ! लंबी सूची है सबालों की।शिवराज भी सब जानते हैं। मैं तो उन्हें खुली चुनोती देता हूँ कि वे मेरे साथ प्रदेश के किसी एक गांव में चल कर यह दिखा दें कि जो बातें सरकारी विज्ञापनों में लिखी जाती हैं वे जमीन पर भी मूर्त रूप ले रहीं हैं?अगर प्रदेश के एक भी गांव में सरकार की सभी घोषणाएं पूरी मिलीं तो मैं भविष्य में कभी शिवराज सरकार पर सवाल नही उठाऊंगा!

लेकिन अगर नही मिला तो कम से कम यह उम्मीद तो करूँगा की मुख्यमंत्री जनता को मूर्ख बनाने के लिये उपवास जैसी नॉटंकी न करें !साथ ही जिन चाटुकार अफसरों और चारण ख़बरनबीसों से वे घिरे हैं उन पर निर्भरता कम करें! शिवराज जी आपका उपवास किसान का भला नही करेगा!अगर कुछ करना है तो गांव में अपनी योजनाओं और घोषणाओं पर अमल करबाइये!अगर आप उपवास करेंगे तो बस एक लाभ होगा!पैकेज पर चलने बाला मीडिया किसानों को छोड़ आप पर कैमरा तान देगा!एक बार फिर किसान पीछे और आप आगे हो जाएंगे!
आप आगे रहिये!हमे कोई आपत्ति नही!लेकिन किसानों की आड़ लेकर गांधी के उपवास अस्त्र का इस्तेमाल तो मत कीजिये!!! – अरुण दीक्षित