डोल ग्यारस आज, जाने का क्या महत्व

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नई-दिल्ली । कहते हैं मनुष्य जीवन का अंत ही बहुत ही दुखदाई हैं होता हैं. हिन्दू उपवास में डोल ग्यारस का अपना ही महत्व है उसे सुधारने हेतु एकदशी का व्रत किया जाता हैं. उन्ही में से एक हैं डोल ग्यारस डोल ग्यारस कई नामों से जाना जाता है जैसा परिवर्तनी एकादशी, वामन जयंती, डोल ग्यारस  भादो शुक्ल पक्ष के ग्यारहवे दिन यह ग्यारस मनाई जाती हैं. इस वर्ष 2017 में डोल ग्यारस परिवर्तनी एकादशी वामन जयंती 2 सितम्बर 2017 को मनाई जा रही है. इस दिन शहर में झाकियाँ प्रस्तुत की जाती हैं.

  • डोल ग्यारस महत्व: डोल ग्यारस के पीछे कई पुराणिक कथा भी है
    इसका महत्व श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था. एकादशी व्रत सबसे महान व्रत में आता हैं उसमे भी इस ग्यारस को बड़ी ग्यारस में गिना जाता हैं. इसके प्रभाव से मनुष्य सभी दुखो का नाश होता हैं  इसकी कथा सुनने से ही सभी का उद्धार हो जाता हैं. डोल ग्यारस की पूजा एवम व्रत का पुण्य कई महान यज्ञ के बराबर है जैसा अश्व मेघ आदि इस दिन भगवान विष्णु एवं बाल कृष्ण की पूजा की जाती हैं जिनके प्रभाव से सभी व्रतो का पुण्य मनुष्य को मिलता हैं.
  • इसे परिवर्तनी एवं वामन ग्यारस क्यूँ कहा जाता हैं ? यह प्रश्न युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से किया था, जिसके उत्तर में श्री कृष्ण ने कहा – इस दिन भगवान विष्णु अपनी शैया पर सोते हुए अपनी करवट बदलते हैं इसलिए इसे परिवर्तनी ग्यारस कहा जाता हैं. इसी दिन दानव बलि जो कि एक धर्म परायण दैत्य राजा था, जिसने तीनो लोको में अपना स्वामित्व स्थापित किया था. उससे भगवान विष्णु ने वामन रूप में उसका सर्वस्व दान में ले लिया था एवं उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर अपनी एक प्रतिमा को राजा बलि को सौंप दिया था. इस प्रकार इसे वामन जयंती कहा जाता हैं.

डोल ग्यारस के उपलक्ष मे एक और कथा कही जाती हैं :
इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप का जलवा पूजन किया गया था अर्थात सूरज पूजा. इस दिन माता यशोदा ने अपने कृष्ण को सूरज देवता के दर्शन करवाकर उन्हें नये कपड़े पहनायें एवं उन्हें शुद्ध कर धार्मिक कार्यो में सम्मिलित किया.इस प्रकार इसे डोल ग्यारस भी कहा जाता हैं. आज भी यहाँ त्यौहार बड़े-धूम से मनाया जाता है  इस दिन भगवान कृष्ण के आगमन के कारण गोकुल में जश्न हुआ था. उसी प्रकार आज तक इस दिन मेले एवम झांकियों का आयोजन किया जाता हैं.

डोल ग्यारस पूजा विधि:

  1.  इस दिन सभी अपनी पूजा एवम व्रत रखते हैं. ग्यारस के व्रत का महत्व हिन्दू धर्म में सबसे अधिक होता हैं
  2. . डोल ग्यारस के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती हैं.
  3. . इस दिन चावल, दही एवम चांदी का दान उत्तम माना जाता हैं.
  4.   इसकी कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य को पापो से मुक्ति मिलती हैं.
  5.  भगवान कृष्ण का बाल श्रृंगार कर उनके लिए डोल तैयार किये जाते हैं.
  6.  जन्माष्टमी व्रत के फल की प्राप्ति हेतु इस ग्यारस के व्रत को करना विशेष माना जाता हैं.

डोल ग्यारस सेलिब्रेशन:

  1.  डोल ग्यारस मुख्य रूप से मध्यप्रदेश एवं उत्तरी भारत में मनाया जाता है. इस भगवान कृष्ण पूजा जाती है
  2.  कहते है बाल रूप में कृष्ण जी पहली बार इस दिन  नगर भ्रमण के लिए निकले थे.
  3.  डोला को बहुत सुंदर भव्य रूप में झांकी की तरह सजाया जाता है. फिर एक बड़े जुलुस के साथ पुरे शहर में ढोल नगाड़ों, के साथ यात्रा निकाली जाती है
  4.  मध्यप्रदेश के गाँव में इस त्यौहार की बहुत धूम रहती है, घाटों के पास मेले लगाये जाते है,
  5.  3-4 घंटे की झांकी के बाद, कृष्ण जी को वापस मंदिर में लाकर स्थापित कर दिया जाता है

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